Sunday, September 01, 2024

राजस्थान की प्राचीन सभ्यताए | Rajasthan Ki Prachin Sbhaytaye

 राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित प्राचीन सभ्यताओं के बारे में विस्तृत विवरण

कालीबंगा सभ्यता 

  • कालीबंगा में रक्षा प्राचीर से दुर्ग तथा निचले नगर के घिरे होने का साक्ष्य प्राप्त हुआ हैं।
  • इसका निर्माण कच्ची मिट्टी की ईंटो से किया गया था
  • कालीबंगा वर्तमान में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित हैं
  • सर्वप्रथम 1952 में अमलानंद घोष के द्वारा खोज की गई और तत्पश्चात 1961 से 1964 के मध्य श्री बी.बीलालश्री बीकेथापर एवं श्री एमडीखरे द्वारा उत्खनन कार्य करवाया गया
  • यहाँ उत्खनन 05 स्तरों तक किया गया
  • कालीबंगा सुव्यवस्थित नगर योजना के अनुसार बसा हुआ था
  • समकोण पर कटती सड़के एवं सड़कों के किनारे नालियां विकास की परिचायक थी 
  • कालीबंगा से जूते हुए खेत के प्रतीक मिलते हैं 
  • कालीबंगा में भूकंप आने के प्राचीनतम प्रतीक भी मिलते हैं 
  • कालीबंगा की लिपी सिन्धु लिपी के समान ही थी, जिसे दायें से बायें लिखा गया था 


बैराठ की सभ्यता

  • बैराठ वर्तमान में राजस्थान के कोटपूतली बहरोड़ जिले में स्थित हैं
  • बैराठ सभ्यता का उत्खनन 1937 में दयाराम साहनी के द्वारा करवाया गया, तत्पश्चात 1962-63 में नीलरत्न बनर्जी एवं कैलाशनाथ के निर्देशन में उत्खनन कार्य करवाया गया
  • बैराठ की गणेशबीजक एवं भीम की डूंगरी से प्राचीन शैल चित्रों के प्रमाण प्राप्त हुये है
  • यहाँ चाँदी की आठ 'पंचमार्क' और इन्डोग्रीक शासकों की 28 मुद्राएँ मिली हैं
  • बैराठ से अशोक स्तम्भ एवं एक गोल मंदिर के अवशेष भी मिले हैं
  • बैराठ के निकट से ही अशोक का भाब्रू अभिलेख प्राप्त हैं, जो अशोक को बोद्ध धर्मानुयायी सिद्ध करता हैं

आहड सभ्यता


  • आहड़ राजस्थान के उदयपुर जिले में आहड़ नदी (बेडच) के तट पर स्थित है
  • यहाँ उत्खनन में चार हजार वर्ष पुरानी प्रस्तर धातु युगीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुये है
  • इसका उत्खनन सर्वप्रथम 1953 में अक्षय कीर्ति व्यास के द्वारा किया गया
  • यहाँ उत्खनन में बस्तियों के आठ स्तर मिले हैं
  • यहाँ मकानों में एक से अधिक चूल्हे मिलना संयुक्त परिवार प्रणाली की विद्यमानता को प्रकट करते हैं
  • आहड़ सभ्यता से मिले मृदभांड इसको लाल काले मृदभांड वाली संस्कृति का प्रमुख केंद्र सिद्ध करते हैं
  • आहड़ का दूसरा नाम ताम्रवती नगरी भी मिलता हैं  जो यहाँ तांबे के ओजारो एवं उपकरणों के अत्यधिक प्रयोग का सूचक हैं
  • तोल के बाट व माप मिलना यहाँ वाणिज्य व्यापार की उन्नति के संकेत करता हैं 

बालाथल सभ्यता


  • बालाथल वर्तमान में उदयपुर की वल्लभनगर तहसील के बालाथल ग्राम में स्थित हैं
  • बालाथल सभ्यता का उत्खनन प्रोवी.एनमिश्र के निर्देशन में 1993 . में किया गया हैं
  • बालाथल में 1800 ईसा पूर्व के लगभग ताम्र पाषाणीक सभ्यता तथा 600 ईसा पूर्व लोहयुगीन सभ्यता आबाद होने का अनुमान हैं
  • उत्खनन में लोहे के ओजार प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुये हैं
  • लोहा गलाने की पांच भट्टियों के अवशेष भी प्राप्त हुये हैं
  • लोह युग में यहाँ नलकूप होने के भी संकेत मिले हैं
  • उत्खनन में मिट्टी से बनी सांड की आकृतियां मिली है, जिनका प्रयोग संभवतः पूजा के लिए किया जाता था

गणेश्वर सभ्यता


  • गणेश्वर सभ्यता वर्तमान में राजस्थान के नीम का थाना जिले में कांटली नदी के उदगम पर स्थित हैं।
  • इसका उत्खनन रत्नचन्द्र अग्रवाल के निर्देशन में हुआ हैं।
  • यहाँ से 2800 ईसा पूर्व की सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुये हैं।
  • गणेश्वर से प्रचुर मात्रा में ताम्र आयुध व उकरण मिले हैं जो इसे ताम्रयुगीन सभ्यताओं में प्राचीनतम सिद्ध करते हैं।
  • गणेश्वर भारत की ताम्र सभ्यताओ की जननी माना जाता हैं।
  • गणेश्वर में मकानों के लिए पत्थर का प्रयोग करने के साक्ष्य मिलते हैं।
  • बस्ती को बाढ़ से बचाने के लिए पत्थर के बाँध भी बनाये जाते थे।

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