Sunday, September 01, 2024

मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Marwar | Rajasthan History for RSSB CET Exam

मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Marwar | Rajasthan History for RSSB CET Exam

राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास/Rathore Dynasty of Marwar के बारे में विस्तृत विवरण - 

  • जोधपुर के राठौड़ो का मूलपुरुष सीहा था।
  • कन्नोज के गहडवाल जयचंद का वंशज माना जाता है।
  • सीहा सेतराम का पुत्र था।
  • सीहा केवल मारवाड़ के एक छोटे से भाग पाली से उत्तर पश्चिम में अपना राज्य स्थापित कर पाया था।
  • बीठू गाँव (पाली के पास) से मिले लेख के अनुसार 1273 ई. में सिंध के मुस्लिम लुटेरो से लड़ते हुये राव सीहा ने वीरगति प्राप्त की।

  • आस्थान
    • आस्थान राव सीहा का पुत्र था।
    • जलालुद्दीन खिलजी की सेना पाली पर आक्रमण के दौरान आस्थान पाली की रक्षा करता हुआ 1291 ई. में वीरगति को प्राप्त हुआ।
  • धूहड
    • आस्थान का उतराधिकारी था।
    • धूहड ने प्रतिहारों को परास्त कर के मण्डोर पर अधिकार किया।

  • रायपाल धूहड का बड़ा पुत्र था।

  • राव चून्डा 
    • राव चून्डा ने अपने साहस और कूटनीति से मण्डोर पर अधिकार कर लिया।
    • राव चून्डा ने मण्डोर को राजधानी बनाई।
    • राव चून्डा ने खाटू, डीडवाना, सांभर, अजमेर, नाडोल आदि पर भी अधिकार कर लिया था।
    • राव चून्डा ने नागौर के पास चून्डासर तालाब बनवाया।
    • राव चून्डा की पत्नी ने चाँद कँवर ने "चाँद बावड़ी (जोधपुर)" का निर्माण करवाया।
    • पुंगल के भाटियों द्वारा धोखे से 1423 ई. में मारा गया।

  • राव जोधा 
    • राव जोधा मारवाड़ के रणमल का पुत्र था
    • राव जोधा ने 1459 ई. में जोधपुर नगर बसाया और राजधानी बनायी
    • राव जोधा ने चिड़ियाटूंक पहाड़ी पर मेहरानगढ़ दुर्ग बनवाया
    • राव जोधा ने किले के भीतर नागनेची माता का मंदिर बनवाया
    • राव जोधा की पत्नी जसमादे ने जोधपुर में राणीसर तालाब बनवाया

  • राव मालदेव
    • राव मा​लदेव, राव गांगा का पुत्र था
    • राव मा​लदेव  ने खानवा के युद्ध में राणा सांगा की ओर से भाग लिया
    • 1536 ई. में जैसलमेर के राव लूणकरण की पुत्री "उमादे" से विवाह किया, जो इतिहस में "रूठी रानी" के नाम से प्रसिद्ध हुई
    • 1543-44 ई. में राव मा​लदेव को शेरशाह सूरी के विरुद्ध युद्ध लड़ना पड़ा
    • राव मा​लदेव के सेनापति जेता और कूंपा ने जनवरी, 1544 में गिरी सुमेल में शेरशाह से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हो गये
    • शेरशाह की मृत्यु के बाद मालदेव ने पुन जोधपुर और आसपास के क्षेत्र पर अधिकार कर लिया
    • 1557 ई. में "हरमाड़ा" के युद्ध में राव मा​लदेव ने मेवाड़ के शासक राणा उदयसिंह को परास्त किया
    • अबुल फजल और निजामुद्दीन ने राव मालदेव की प्रशंसा करते हुये उसे "हशमत वाला राजा" कहा है
    • राव मालदेव ने जोधपुर गढ़ के कोट के साथ राणीसर कोट और शहरपनाह बनवाया
    • अजमेर के तारागढ़ दुर्ग में पानी व्यवस्था करवाई। 

  • राव चन्द्रसेन
    • राव चन्द्रसेन, राव मालदेव का पुत्र था
    • राव चन्द्रसेन को अपने बड़े भाइयों राम और उदयसिंह के विरोध का सामना करना पड़ा
    • अकबर ने हुसैन कुली खां के नेतृत्व में सेना भेजकर जोधपुर पर अधिकार कर लिया
    • चंद्रसेन ने भाद्राजूण और सिवाना में रहकर मुगल सेना का सामना किया और मुगलों से अधीनता स्वीकार नही की
    • पहाड़ो में भटकते हुये 11 जनवरी, 1581 को राव चंद्रसेन का देहांत हो गया
    • विश्वेश्वरनाथ रेऊ ने जोधपुर के राव चंद्रसेन की तुलना महाराणा प्रताप से की

  •  मोटा राजा उदयसिंह
    • 1583 ई. में अकबर ने मोटा राजा उदयसिंह को मुगल अधीनता में जोधपुर का शासक नियुक्त किया
    • मोटा राजा उदयसिंह राव चंद्रसेन का भाई था
    • मोटा राजा उदयसिंह ने 1587 ई. में अपनी पुत्री जोधा बाई (जगत गुसाई) का विवाह जंहागीर के साथ कर दिया
    • उदय सिंह के पुत्र किशनसिंह ने 1609 ई. में किशनगढ़ बसाकर उसे राठौड़ सत्ता का तीसरा केंद्र बनाया गया

  • राव सूरसिंह
    • अकबर ने सूरसिंह को सावी राजा की उपाधि दी।
    • जंहागीर ने सूरसिंह को 5000 का मनसब प्रदान किया।

  • महाराजा गजसिंह
    • जंहागीर  ने गजसिंह को तीन हजार जात और दो हजार सवार के मनसब, झंडा और राजा की उपाधि से सम्मानित किया।
    • बीजापुर और कंधार अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया।
    • जंहागीर ने 1621 ई. में गजसिंह को "दलथम्मन" की उपाधि दी।
    • गजसिंह ने अपनी प्रेमिका अनारा बेगम के प्रभाव में आकर छोटे पुत्र जसवंतसिंह को अपना उतराधिकारी बनाया।
    • 1638 ई. में गजसिंह की मृत्यु आगरा में हुई।
    • गजसिंह के बड़े पुत्र अमरसिंह को शाहजहाँ ने नागौर परगना प्रदान किया।

  • जसवंतसिंह प्रथम 
    • महाराजा जसवंत सिंह का जन्म 26 दिसंबर, 1626 को बुरहानपुर में हुआ
    • शाहजहाँ द्वारा टीका और खिलअत दी गई, साथ ही राजा का खिताब और 6000 जात एवं 6000 सवार का मनसब भी दिया गया
    • 1640 ई. में जोधपुर पहुचने पर गद्दीनशीनी का उत्सव मनाया गया
    • उतराधिकारी युद्ध (1657 -58) में ओरंगजेब के विरुद्ध धर्मत के युद्ध में दारा का साथ दिया
    • मुहणौत नैणसी मारवाड़ के जसवंतसिंह प्रथम के दरबार मे मंत्री था।
    • जसवंतसिंह प्रथम के समय सूरत मिश्र, न्रहरिदास, नवीन कवि एवं बनारसी दास आदि प्रसिद्ध विद्वान् थे।
    • जसवंत सिंह की पत्नी अतीरंगदे ने जोधपुर में जानसागर तालाब का निर्माण करवाया, जिसे शेखावात जी का तालाब कहा जाता है।
    • दूसरी पत्नी जसवंतदे ने जोधपुर में राइका बाग और कल्याण सागर का निर्माण करवाया, जिसे वर्तमान में रातानाडा कहा जाता है

  • अजीत सिंह
    • जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद 1679 में लाहौर में अजीत सिंह का जन्म हुआ।
    • अजीत सिंह का लालन पोषण गौरा धाय ने किया, जिसको मारवाड़ की पन्नाधाय कहा जाता है।
    • जोधपुर में फतहमहल मूलनायक एवं घनश्याम मंदिर का निर्माण करवाया।
    • दुर्गा पथ, भाषा और गुणसागर नामक ग्रन्थ लिखे।

  • अभय सिंह
    • अअभय सिंह के शासनकाल में हकीम गिरधारी दास ने खेजड़ली में पेड़ कटवाने के आदेश दिए
    • 28 अगस्त, 1730 को अमृता देवी के नेतृत्व में 363 स्त्री-पुरुष मारे गए, इस घटना को "खेजड़ली आंदोलन" के नाम से जाना जाता है
    • "खेजड़ली आंदोलन" की स्मृति में खेजड़ली में प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को विश्व का एकमात्र "वृक्ष मेला" आयोजित किया जाता है
    • अभय सिंह के शासन काल में जोधपुर में पेड़ो को बचाने के लिए 28 अगस्त, 1730 को अमृतादेवी के नेतृत्व में 363 स्त्री-पुरुष मारे गये, इस घटना को "खेजडली आन्दोलन" के नाम से जाना जाता है।

  • विजयसिंह 
    • विजय सिंह ने 1781 ईस्वी में मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय से मारवाड़ में टकसाल खोलने की अनुमति प्रदान प्राप्त की और अपने नाम से विजयशाही सिक्के चलाए
    • विजय सिंह पर पासवान गुलाबराय का अत्यधिक प्रभाव था,
    • वीर विनोद में श्यामलदास ने इसे जहांगीर का नमूना और गुलाब राय को जोधपुर का नूरजहाँ कहा है।

  • मानसिंह 
    • जयपुर के शासक जगत सिंह के साथ 13मार्च, 1807 में "गिंगोली का युद्ध " हुआ।
    • जोधपुर में नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ "महामंदिर" का निर्माण करवाया।
    • जोधपुर में मान पुस्तकालय की स्थापना करवाई।
    • 6 जनवरी, 1818 में अंग्रेजों से संधि कर उनकी अधीनता स्वीकार कर ली।
    • मानसिंह के शासन काल में अंग्रेजों ने 1835 ई. में ऐरनपुरा में "जोधपुर लीजन" का गठन किया गया।

  • महाराजा तख्तसिंह (1843-73)
    • 1843 ई. में अंग्रेज सरकार के समक्ष "अमरकोट" पर दावा पेश किया
    • 1857 ई. की क्रांति के समय जोधपुर शासक महाराजा तख्तसिंह था
    • 1857 ई. की क्रांति के समय महाराजा ने अंग्रेजों की सहायता की
    • 1870 ई. में लार्ड मेयो के दरबार में भाग नही लेने पर महाराजा की सलामी की तोपों की संख्या कम कर दी गयी

  • ​जसवंतसिंह द्वितीय
    • जसवंतसिंह द्वितीय के द्वारा दिसम्बर, 1875 के कलकता एवं 1877 ई. के दिल्ली दरबार में भाग लिया।
    • जसवंतसिंह द्वितीय के काल में वर्ष 1883 में स्वामी दयानन्द सरस्वती जोधपुर आये थे
    • जसवंतसिंह द्वितीय के काल में जोधपुर में आर्य समाज की स्थापना हुई थी।
    • जसवंतसिंह द्वितीय के काल में ही जोधपुर में बाल विवाह पर प्रतिबन्ध लगाया गया।
    • महारानी विक्टोरिया के स्वर्ण जुबली उत्सव में भाग लेने के लिए 1887 ई. में प्रतापसिंह को मारवाड़ के प्रतिनधि के रूप इंग्लेंड भेजा

  • सरदार सिंह
    • चीन के बोक्सर युद्ध को दबाने के लिए मारवाड़ी सेना अंग्रेजों की सहायतार्थ भेजी
    • सरदार सिंह ने जसवंतसिंह द्वितीय की स्मृति में "जसवंत थड़ा" का निर्माण करवाया, जिसे राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है।
    • इसने 1910 ई. में 29000 रु.वार्षिक मंजूर कर "एडवर्ड रिलीफ फंड" बनाया, जिससे असमर्थ लोगों को पेंशन दी जाती थी।

  • उम्मेद सिंह
    • उम्मेद सिंह के द्वारा 18 नवम्बर, 1929 को जोधपुर में "छितर पैलेस" (उम्मेद पैलेस) की नींव रखी गई।
    • उम्मेद सिंह ने गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए राज्य प्रतिनिधि के रूप में जे. डब्ल्यू, यंग को भेजा।
    • जयनारायण व्यास को मारवाड़ की ओर से संविधान सभा का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।

  • हनुवंत सिंह
    • जोधपुर के राठौड़ वंश का अंतिम शासक था।
    • हनुवंत सिंह ने 9 अगस्त, 1947 को भारतीय संघ अधिनियम पर हस्ताक्षर किये

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