मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Marwar | Rajasthan History for RSSB CET Exam
राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास/Rathore Dynasty of Marwar के बारे में विस्तृत विवरण -
- जोधपुर के राठौड़ो का मूलपुरुष सीहा था।
- कन्नोज के गहडवाल जयचंद का वंशज माना जाता है।
- सीहा सेतराम का पुत्र था।
- सीहा केवल मारवाड़ के एक छोटे से भाग पाली से उत्तर पश्चिम में अपना राज्य स्थापित कर पाया था।
- बीठू गाँव (पाली के पास) से मिले लेख के अनुसार 1273 ई. में सिंध के मुस्लिम लुटेरो से लड़ते हुये राव सीहा ने वीरगति प्राप्त की।
- आस्थान
- आस्थान राव सीहा का पुत्र था।
- जलालुद्दीन खिलजी की सेना पाली पर आक्रमण के दौरान आस्थान पाली की रक्षा करता हुआ 1291 ई. में वीरगति को प्राप्त हुआ।
- धूहड
- आस्थान का उतराधिकारी था।
- धूहड ने प्रतिहारों को परास्त कर के मण्डोर पर अधिकार किया।
- रायपाल धूहड का बड़ा पुत्र था।
- राव चून्डा
- राव चून्डा ने अपने साहस और कूटनीति से मण्डोर पर अधिकार कर लिया।
- राव चून्डा ने मण्डोर को राजधानी बनाई।
- राव चून्डा ने खाटू, डीडवाना, सांभर, अजमेर, नाडोल आदि पर भी अधिकार कर लिया था।
- राव चून्डा ने नागौर के पास चून्डासर तालाब बनवाया।
- राव चून्डा की पत्नी ने चाँद कँवर ने "चाँद बावड़ी (जोधपुर)" का निर्माण करवाया।
- पुंगल के भाटियों द्वारा धोखे से 1423 ई. में मारा गया।
- राव जोधा
- राव जोधा मारवाड़ के रणमल का पुत्र था।
- राव जोधा ने 1459 ई. में जोधपुर नगर बसाया और राजधानी बनायी।
- राव जोधा ने चिड़ियाटूंक पहाड़ी पर मेहरानगढ़ दुर्ग बनवाया।
- राव जोधा ने किले के भीतर नागनेची माता का मंदिर बनवाया।
- राव जोधा की पत्नी जसमादे ने जोधपुर में राणीसर तालाब बनवाया
- राव मालदेव
- राव मालदेव, राव गांगा का पुत्र था।
- राव मालदेव ने खानवा के युद्ध में राणा सांगा की ओर से भाग लिया।
- 1536 ई. में जैसलमेर के राव लूणकरण की पुत्री "उमादे" से विवाह किया, जो इतिहस में "रूठी रानी" के नाम से प्रसिद्ध हुई।
- 1543-44 ई. में राव मालदेव को शेरशाह सूरी के विरुद्ध युद्ध लड़ना पड़ा।
- राव मालदेव के सेनापति जेता और कूंपा ने जनवरी, 1544 में गिरी सुमेल में शेरशाह से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हो गये।
- शेरशाह की मृत्यु के बाद मालदेव ने पुन जोधपुर और आसपास के क्षेत्र पर अधिकार कर लिया।
- 1557 ई. में "हरमाड़ा" के युद्ध में राव मालदेव ने मेवाड़ के शासक राणा उदयसिंह को परास्त किया।
- अबुल फजल और निजामुद्दीन ने राव मालदेव की प्रशंसा करते हुये उसे "हशमत वाला राजा" कहा है।
- राव मालदेव ने जोधपुर गढ़ के कोट के साथ राणीसर कोट और शहरपनाह बनवाया।
- अजमेर के तारागढ़ दुर्ग में पानी व्यवस्था करवाई।
- राव चन्द्रसेन
- राव चन्द्रसेन, राव मालदेव का पुत्र था।
- राव चन्द्रसेन को अपने बड़े भाइयों राम और उदयसिंह के विरोध का सामना करना पड़ा।
- अकबर ने हुसैन कुली खां के नेतृत्व में सेना भेजकर जोधपुर पर अधिकार कर लिया।
- चंद्रसेन ने भाद्राजूण और सिवाना में रहकर मुगल सेना का सामना किया और मुगलों से अधीनता स्वीकार नही की।
- पहाड़ो में भटकते हुये 11 जनवरी, 1581 को राव चंद्रसेन का देहांत हो गया।
- विश्वेश्वरनाथ रेऊ ने जोधपुर के राव चंद्रसेन की तुलना महाराणा प्रताप से की।
- मोटा राजा उदयसिंह
- 1583 ई. में अकबर ने मोटा राजा उदयसिंह को मुगल अधीनता में जोधपुर का शासक नियुक्त किया।
- मोटा राजा उदयसिंह राव चंद्रसेन का भाई था।
- मोटा राजा उदयसिंह ने 1587 ई. में अपनी पुत्री जोधा बाई (जगत गुसाई) का विवाह जंहागीर के साथ कर दिया।
- उदय सिंह के पुत्र किशनसिंह ने 1609 ई. में किशनगढ़ बसाकर उसे राठौड़ सत्ता का तीसरा केंद्र बनाया गया।
- राव सूरसिंह
- अकबर ने सूरसिंह को सावी राजा की उपाधि दी।
- जंहागीर ने सूरसिंह को 5000 का मनसब प्रदान किया।
- महाराजा गजसिंह
- जंहागीर ने गजसिंह को तीन हजार जात और दो हजार सवार के मनसब, झंडा और राजा की उपाधि से सम्मानित किया।
- बीजापुर और कंधार अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया।
- जंहागीर ने 1621 ई. में गजसिंह को "दलथम्मन" की उपाधि दी।
- गजसिंह ने अपनी प्रेमिका अनारा बेगम के प्रभाव में आकर छोटे पुत्र जसवंतसिंह को अपना उतराधिकारी बनाया।
- 1638 ई. में गजसिंह की मृत्यु आगरा में हुई।
- गजसिंह के बड़े पुत्र अमरसिंह को शाहजहाँ ने नागौर परगना प्रदान किया।
- जसवंतसिंह प्रथम -
- महाराजा जसवंत सिंह का जन्म 26 दिसंबर, 1626 को बुरहानपुर में हुआ।
- शाहजहाँ द्वारा टीका और खिलअत दी गई, साथ ही राजा का खिताब और 6000 जात एवं 6000 सवार का मनसब भी दिया गया।
- 1640 ई. में जोधपुर पहुचने पर गद्दीनशीनी का उत्सव मनाया गया।
- उतराधिकारी युद्ध (1657 -58) में ओरंगजेब के विरुद्ध धर्मत के युद्ध में दारा का साथ दिया।
- मुहणौत नैणसी मारवाड़ के जसवंतसिंह प्रथम के दरबार मे मंत्री था।
- जसवंतसिंह प्रथम के समय सूरत मिश्र, न्रहरिदास, नवीन कवि एवं बनारसी दास आदि प्रसिद्ध विद्वान् थे।
- जसवंत सिंह की पत्नी अतीरंगदे ने जोधपुर में जानसागर तालाब का निर्माण करवाया, जिसे शेखावात जी का तालाब कहा जाता है।
दूसरी पत्नी जसवंतदे ने जोधपुर में राइका बाग और कल्याण सागर का निर्माण करवाया, जिसे वर्तमान में रातानाडा कहा जाता है।
- अजीत सिंह
- जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद 1679 में लाहौर में अजीत सिंह का जन्म हुआ।
- अजीत सिंह का लालन पोषण गौरा धाय ने किया, जिसको मारवाड़ की पन्नाधाय कहा जाता है।
- जोधपुर में फतहमहल मूलनायक एवं घनश्याम मंदिर का निर्माण करवाया।
- दुर्गा पथ, भाषा और गुणसागर नामक ग्रन्थ लिखे।
- अभय सिंह
- अअभय सिंह के शासनकाल में हकीम गिरधारी दास ने खेजड़ली में पेड़ कटवाने के आदेश दिए।
- 28 अगस्त, 1730 को अमृता देवी के नेतृत्व में 363 स्त्री-पुरुष मारे गए, इस घटना को "खेजड़ली आंदोलन" के नाम से जाना जाता है।
- "खेजड़ली आंदोलन" की स्मृति में खेजड़ली में प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को विश्व का एकमात्र "वृक्ष मेला" आयोजित किया जाता है।
- अभय सिंह के शासन काल में जोधपुर में पेड़ो को बचाने के लिए 28 अगस्त, 1730 को अमृतादेवी के नेतृत्व में 363 स्त्री-पुरुष मारे गये, इस घटना को "खेजडली आन्दोलन" के नाम से जाना जाता है।
- विजयसिंह
- विजय सिंह ने 1781 ईस्वी में मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय से मारवाड़ में टकसाल खोलने की अनुमति प्रदान प्राप्त की और अपने नाम से विजयशाही सिक्के चलाए।
- विजय सिंह पर पासवान गुलाबराय का अत्यधिक प्रभाव था,
- वीर विनोद में श्यामलदास ने इसे जहांगीर का नमूना और गुलाब राय को जोधपुर का नूरजहाँ कहा है।
- मानसिंह
- जयपुर के शासक जगत सिंह के साथ 13मार्च, 1807 में "गिंगोली का युद्ध " हुआ।
- जोधपुर में नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ "महामंदिर" का निर्माण करवाया।
- जोधपुर में मान पुस्तकालय की स्थापना करवाई।
- 6 जनवरी, 1818 में अंग्रेजों से संधि कर उनकी अधीनता स्वीकार कर ली।
- मानसिंह के शासन काल में अंग्रेजों ने 1835 ई. में ऐरनपुरा में "जोधपुर लीजन" का गठन किया गया।
- महाराजा तख्तसिंह (1843-73)
- 1843 ई. में अंग्रेज सरकार के समक्ष "अमरकोट" पर दावा पेश किया।
- 1857 ई. की क्रांति के समय जोधपुर शासक महाराजा तख्तसिंह था।
- 1857 ई. की क्रांति के समय महाराजा ने अंग्रेजों की सहायता की।
- 1870 ई. में लार्ड मेयो के दरबार में भाग नही लेने पर महाराजा की सलामी की तोपों की संख्या कम कर दी गयी।
- जसवंतसिंह द्वितीय
- जसवंतसिंह द्वितीय के द्वारा दिसम्बर, 1875 के कलकता एवं 1877 ई. के दिल्ली दरबार में भाग लिया।
- जसवंतसिंह द्वितीय के काल में वर्ष 1883 में स्वामी दयानन्द सरस्वती जोधपुर आये थे।
- जसवंतसिंह द्वितीय के काल में जोधपुर में आर्य समाज की स्थापना हुई थी।
- जसवंतसिंह द्वितीय के काल में ही जोधपुर में बाल विवाह पर प्रतिबन्ध लगाया गया।
- महारानी विक्टोरिया के स्वर्ण जुबली उत्सव में भाग लेने के लिए 1887 ई. में प्रतापसिंह को मारवाड़ के प्रतिनधि के रूप इंग्लेंड भेजा।
- सरदार सिंह
- चीन के बोक्सर युद्ध को दबाने के लिए मारवाड़ी सेना अंग्रेजों की सहायतार्थ भेजी।
- सरदार सिंह ने जसवंतसिंह द्वितीय की स्मृति में "जसवंत थड़ा" का निर्माण करवाया, जिसे राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है।
- इसने 1910 ई. में 29000 रु.वार्षिक मंजूर कर "एडवर्ड रिलीफ फंड" बनाया, जिससे असमर्थ लोगों को पेंशन दी जाती थी।
- उम्मेद सिंह
- उम्मेद सिंह के द्वारा 18 नवम्बर, 1929 को जोधपुर में "छितर पैलेस" (उम्मेद पैलेस) की नींव रखी गई।
- उम्मेद सिंह ने गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए राज्य प्रतिनिधि के रूप में जे. डब्ल्यू, यंग को भेजा।
- जयनारायण व्यास को मारवाड़ की ओर से संविधान सभा का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।
- हनुवंत सिंह
- जोधपुर के राठौड़ वंश का अंतिम शासक था।
- हनुवंत सिंह ने 9 अगस्त, 1947 को भारतीय संघ अधिनियम पर हस्ताक्षर किये।
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