राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित 1857 ई. की क्रांति के बारे में विस्तृत विवरण
- राजस्थान का कच्छवाह वंश का इतिहास | Kachwaha Dynasty of Amer (Jaipur)
- 1137 ई. में दूल्हराय ने दौसा के बडगुर्जरों को परास्त कर ढूंढाड़ में कच्छवाह वंश का नवीन राज्य स्थापित किया था।
- सूर्यमल मिसण के अनुसार कूर्म नामक रघुवंशी शासक की संतति होने से ये कूर्मवंशीय कहलाने लगे।
- डॉ. ओझा के अनुसार इनका मूलपुरुष कच्छवाहा था।
- दूल्हराय ने ही जमवारामगढ़ में मीणों को परास्त कर अपनी राजधानी बनाया था।
- कच्छवाह वंश की प्रथम राजधानी दौसा, दूसरी जमवारामगढ़, तीसरी आमेर और चौथी राजधानी जयपुर रही थी।
- कच्छवाह वंश के नरु से नरुका और शेखा से शेखावत शाखाएँ निकली थी, जिस भाग शेखा ने राज्य स्थापित किया, शेखावाटी नाम से प्रसिद्ध हुआ।
- कच्छवाह वंश के शासक राजदेव ने 1237 ई. में आमेर में प्रसिद्ध कदमी महलों का निर्माण करवाया, जिनमें बनी छतरी में कच्छवाह शासको का राजतिलक होता था।
- चंद्रसेन का उत्तराधिकारी पृथ्वीराज 1527 ई. में खानवा के युद्ध में महाराणा सांगा की ओर से लड़ता हुआ वीरगति को प्राप्त हुआ था।
- 1207 ई. में काकिलदेव ने आमेर में मीणों को परास्त कर आमेर को कच्छवाहा वंश की राजधानी स्थापित की।
- धुल्हेराय
- 1137 ई. में दूल्हराय ने दौसा के बडगुर्जरों को परास्त कर ढूंढाड़ में कच्छवाह वंश का नवीन राज्य स्थापित किया था।
- दूल्हराय ने ही जमवारामगढ़ में मीणों को परास्त कर अपनी राजधानी बनाया था।
- 1207 ई. में काकिलदेव ने आमेर में मीणों को परास्त कर आमेर को कच्छवाहा वंश की राजधानी स्थापित की।
- भारमल
- भारमल मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला पहला राजपूत शासक था।
- मजनू खां ने दिसंबर, 1556 में अकबर और भारमल की मित्रता कार्रवाई।
- 20 जनवरी 1562 में सांभर में ही अपने पुत्र भगवान दास और पौत्र मानसिंह सहित भारमल ने अकबर की अधीनता स्वीकार कर ली।
- जनवरी, 1562 में अजमेर से लौटते समय सांभर में भारमल ने पुत्री हरकूबाई या मानमती का विवाह अकबर के साथ किया।
- जहांगीर हरकू भाई का पुत्र था, इस कारण भारमल मुगलों से वैवाहिक संबंध स्थापित करने वाला पहला राजपूत शासक था।
- अकबर ने भारमल को 5000 का मनसब एवं अमीर उल उमरा उपाधि प्रदान की थी।
- भगवंतदास
- भगवंतदास भारमल का पुत्र था।
- अकबर ने भगवंतदास को टीका भिजवाया और 5000 का मनसब एवं अमीर उल उमरा की पदवी दी।
- भगवंतदास ने पुत्री मानबाई का विवाह जहांगीर के साथ किया, खुसरो मानबाई से उत्पन्न जहांगीर का पुत्र था।
- 1583 से 1598 ई तक पंजाब के सूबेदार के रूप में कार्य किया।
- 1589 ई. में लाहौर में भगवंतदास की मृत्यु हुई।
- मानसिंह
- मानसिंह अकबर के नवरत्नों में शामिल था।
- अकबर ने मानसिंह को फर्जन्द की उपाधि व 7000 का मनसब दिया।
- मानसिंह ने काबुल, बंगाल, बिहार आदि के सूबेदार के रूप में कार्य किया।
- मानसिंह ने बिहार में मानपुर और बंगाल में अकबरपुर/राजमहल की स्थापना की और रोहतासगढ़ में सुंदर महलों का निर्माण करवाया।
- मानसिंह ने बंगाल के शासक केदारनाथ को परास्त करके बंगाल से शीलादेवी की मूर्ति लाकर, उसे आमेर में प्रतिष्ठित करवाया।
- मानसिंह के पुत्र जगत सिंह की बंगाल अभियान के दौरान मृत्यु होने पर उसकी माता कनकावती ने जगत सिंह की स्मृति में आमेर में जगत शिरोमणि मंदिर का निर्माण करवाया, मूर्ति मानसिंह चित्तौड़ के मीरा मंदिर से लाए थे।
- मानसिंह के द्वारा अकबर एवं जहांगीर मुगल सम्राटों की सेवा की गई।
- अकबर के रणथम्भोर अभियान में सुरजन हाड़ा को मुगल अधीनता स्वीकार करवाने में मानसिंह ने प्रमुख भूमिका निभाई।
- 1573 ई. में मानसिंह महाराणा प्रताप के पास मुगलों से संधि करने का दूसरा प्रस्ताव लेकर गए।
- मानसिंह की मृत्यु 6 जुलाई 1614 में इलिचपुर में हुई।
- मिर्जा राजा जयसिंह
- राजा जयसिंह प्रथम को तीन मुगल सम्राट जहांगीर, शाहजहां और औरंगजेब की सेवा में रहने का अवसर प्राप्त हुआ।
- शाहजहां ने जयसिंह प्रथम को मिर्जा राजा की पदवी देकर शुजा के साथ कंधार भेजा।
- शिवाजी और जयसिंह प्रथम के मध्य संधि को पुरंदर की संधि (1665 ई.) के नाम से जाना जाता है।
- जयसिंह प्रथम के दरबार में प्रसिद्ध बिहारी कवि था, जयसिंह के द्वारा उसके एक-एक दोहे पर एक-एक स्वर्ण मुद्रा प्रदान की।
- 2 जुलाई 1667 को बुरहानपुर में सवाई जयसिंह की मृत्यु हो गई।
- सवाई जयसिंह द्वितीय
- जयसिंह प्रथम की तुलना में जयसिंह द्वितीय की वीरता और वाक्पटुता के कारण औरंगजेब ने सवाई जयसिंह नाम रख दिया।
- 1707 ई के उत्तराधिकार युद्ध में जयसिंह ने आजम का पक्ष लिया, लेकिन युद्ध में मुअज्जम ने विजय प्राप्त की।
- मुअज्जम जो बहादुरशाह के नाम से शासक बना, आमेर पहुंचकर विजयसिंह को शासक घोषित कर दिया और आमेर का नाम इस्लामाबाद या मोमीनाबाद रख दिया।
- 1725 ईस्वी में सवाई जयसिंह ने नक्षत्रो की शुद्ध सारणी बनवाई और इसका नाम जीज मोहम्मदशाही रखा।
- सवाई जयसिंह के द्वारा जयसिंह कारिका नामक ज्योतिष ग्रंथ की रचना की गई।
- सवाई जयसिंह ने जयपुर, दिल्ली, मथुरा, उज्जैन और बनारस में वेधशालाएं बनवाई, जयपुर का जंतर मंतर सबसे बड़ा है।
- जयसिंह ने विद्याधर नामक बंगाली वास्तुशास्त्र के ज्ञाता से एक नगर का नक्शा बनवाकर 18 नवम्बर, 1727 को जयपुर नगर की स्थापना करवाई गई।
- सवाई जयसिंह अंतिम हिंदू शासक था, जिसने अश्वमेध यज्ञ संपन्न करवाएं।
- 1734 ईस्वी में सवाई जयसिंह ने जयपुर में नाहरगढ़ या सुदर्शन गढ़ किले का निर्माण करवाया।
- सवाई जयसिंह ने जयगढ़ में जयबाण तोप का निर्माण करवाया, जो एशिया की सबसे बड़ी तोप मानी जाती है।
- सवाई जयसिंह ने चंद्रमहल, सिसोदिया रानी का महल व जलमहल का निर्माण करवाया।
- ईश्वरीसिंह
- ईश्वरीसिंह सवाई जयसिंह का ज्येष्ठ पुत्र था।
- टोंक के राजमहल के युद्ध में जयपुर की राजगद्दी को लेकर उसके सौतेले भाई माधोसिंह के साथ इसका संघर्ष हुआ।
- टोंक के राजमहल युद्ध में विजय के उपलक्ष में ईश्वरलाट का निर्माण करवाया गया।
- मराठौ की सहायता से माधव सिंह ने बगरू के युद्ध (1748 ई.) में ईश्वरीसिंह को परास्त कर दिया।
- होल्कर का जयपुर पर दबाव बढ़ने पर ईश्वरीसिंह ने 1750 ई. में आत्महत्या कर ली।
- माधोसिंह प्रथम
- सवाई माधोसिंह प्रथम मेवाड़ राजकुमारी चंद्रकुंअरी एवं सवाई जयसिंह का पुत्र था।
- 1761 ई. में भटवारा के युद्ध में कोटा के शासक शत्रुसाल से परास्त हुआ।
- 1763 ई. में सवाई माधोसिंह प्रथम ने सवाई माधोपुर की स्थापना की।
- चाकसू में शीतला माता मंदिर का निर्माण करवाया।
- नाहरगढ़ दुर्ग में एक जैसे 9 महल बनवाये।
- सवाई प्रतापसिंह
- सवाई प्रताप सिंह के शासनकाल को संगीत का स्वर्ण काल कहा जाता है।
- 1787 ई. में जयपुर के तुंगा में सवाई प्रताप सिंह और महादजी सिंधिया के मध्य युद्ध हुआ।
- 1799 ई. में जयपुर में 5 मंजिला हवामहल का निर्माण करवाया गया, हवामहल भगवान विष्णु को समर्पित है।
- हवामहल में 953 खिड़कियां है, हवामहल का वास्तुकार उस्ताद लालचंद्र था।
- सवाई प्रताप सिंह ब्रिजनिधि उपनाम से कविताएं लिखता था, इसकी कविताओं के संग्रह को ब्रिजनिधि ग्रंथावली के नाम से जाना जाता है।
- सवाई प्रताप सिंह के दरबार में 22 विद्वान रहते थे, जिन्हें प्रताप बाईसी/गंधर्व बाईसी कहा जाता था।
- सवाई प्रताप सिंह के संगीत गुरु चाँदखां थे, सवाई प्रताप सिंह के द्वारा गुरू को बुद्ध प्रकाश की उपाधि दी।
- सवाई प्रताप सिंह ने राधा गोविंद संगीत सार नामक ग्रंथ लिखा।
- सवाई जगतसिंह
- सवाई जगतसिंह ने 15 अप्रैल 1818 को अंग्रेजों से संधि कर उनकी अधीनता स्वीकार की।
- रसकपुर नामक नर्तकी से संबंध होने के कारण इसे जयपुर का बदनाम शासक भी माना जाता है।
- मेवाड़ राजकुमारी कृष्णा से विवाह के मामले को लेकर 13 मार्च, 1807 को गिंगोली (नागौर) के युद्ध में मारवाड़ के शासक मानसिंह को परास्त किया।
- सवाई राम सिंह द्वितीय
- राज्याभिषेक के समय सवाई राम सिंह द्वितीय अल्पव्यस्क होने के कारण शासन पर रीजेंसी कौंसिल के अध्यक्ष मेजर लुडलो का नियंत्रण रहा।
- लूडलों ने राजस्थान में समाधि प्रथा और कन्या क्रय विक्रय पर सर्वप्रथम जयपुर रियासत में प्रतिबंध लगाया।
- 1857 की क्रांति के समय सवाई राम सिंह द्वितीय ने अंग्रेजों का सहयोग किया, इसके उपलक्ष में अंग्रेजों द्वारा सितार ए हिंद की उपाधि प्रदान की गई।
- सवाई राम सिंह द्वितीय के द्वारा जयपुर में मदरसा हुनरी की स्थापना की गई, जिसका माधोसिंह द्वितीय ने नाम बदलकर राजस्थान स्कूल आफ आर्ट्स एंड क्राफ्ट्स कर दिया।
- ब्रिटिश शासन एडवर्ड पंचम के जयपुर आगमन पर राम सिंह ने 1868 ईस्वी में जयपुर को गुलाबी रंग से पुतवाया।
- सवाई राम सिंह द्वितीय ने 1876 ईस्वी में पोथिखाना और प्रिंस अल्बर्ट के जयपुर आगमन पर अल्बर्ट हॉल संग्रहालय की स्थापना करवाई गयी।
- सवाई राम सिंह द्वितीय ने जयपुर में राम प्रकाश थिएटर, रामनिवास बाग, रामगढ़ बांध, महाराजा स्कूल व संस्कृत स्कूल की स्थापना की।
- सवाई माधोसिंह द्वितीय
- सवाई माधोसिंह द्वितीय के शासनकाल में राजस्थान के जयपुर में सर्वप्रथम 1904 ई. में डाक टिकट और पोस्टकार्ड की शुरुआत हुई।
- बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के निर्माण के लिए मदनमोहन मालवीय को पांच लाख रुपयों का अनुदान दिया।
- चंद्रमहल में प्रसिद्ध मुबारक महल का निर्माण करवाया, जो मुगल - राजपूत एवं यूरोपियन स्थापत्य कला का नमूना है।
- ब्रिटिश शासन एडवर्ड सप्तम के राज्याभिषेक के अवसर पर चांदी के दो बड़े कलशो में गंगाजल लेकर लंदन गया।
- यह चांदी के कलश वर्तमान में मुबारक महल में रखे गए हैं, जो दुनिया के सबसे बड़े चांदी के पात्र माने जाते है।
- सवाई मानसिंह द्वितीय
- कच्छवाहा वंश के अंतिम शासक सवाई मानसिंह द्वितीय थे।
- राजमाता गायत्री देवी सवाई मानसिंह द्वितीय की पत्नी थी।
- 1943 ई. में जयपुर में महारानी गायत्री देवी स्कूल का निर्माण करवाया गया।
- मानसिंह 1949 से 1956 ई तक राजस्थान के राज्य प्रमुख पद पर रहे।
- मानसिंह पोलो का प्रसिद्ध खिलाड़ी रहा है।
- सवाई मानसिंह द्वितीय के प्रधानमंत्री मिर्ज़ा इस्माइल को आधुनिक जयपुर का निर्माता कहा जाता है।
- मानसिंह की मृत्यु 24 जून 1970 में लंदन में पोलो खेलते समय घोड़े से गिरकर हुई।
- सवाई मानसिंह द्वितीय की पत्नी गायत्री देवी राजस्थान में प्रथम महिला लोकसभा सदस्य रही है।
No comments:
Post a Comment