राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित प्राचीन सभ्यताओं के बारे में विस्तृत विवरण
कालीबंगा सभ्यता
- कालीबंगा में रक्षा प्राचीर से दुर्ग तथा निचले नगर के घिरे होने का साक्ष्य प्राप्त हुआ हैं।
- इसका निर्माण कच्ची मिट्टी की ईंटो से किया गया था।
- कालीबंगा वर्तमान में राजस्थान के हनुमानगढ़ जिले में घग्घर नदी के किनारे स्थित हैं।
- सर्वप्रथम 1952 ई. में अमलानंद घोष के द्वारा खोज की गई और तत्पश्चात 1961 से 1964 ई. के मध्य श्री बी.बी. लाल, श्री बी. के. थापर एवं श्री एम. डी. खरे द्वारा उत्खनन कार्य करवाया गया।
- यहाँ उत्खनन 05 स्तरों तक किया गया।
- कालीबंगा सुव्यवस्थित नगर योजना के अनुसार बसा हुआ था।
- समकोण पर कटती सड़के एवं सड़कों के किनारे नालियां विकास की परिचायक थी ।
- कालीबंगा से जूते हुए खेत के प्रतीक मिलते हैं ।
- कालीबंगा में भूकंप आने के प्राचीनतम प्रतीक भी मिलते हैं ।
- कालीबंगा की लिपी सिन्धु लिपी के समान ही थी, जिसे दायें से बायें लिखा गया था ।
बैराठ की सभ्यता
- बैराठ वर्तमान में राजस्थान के कोटपूतली बहरोड़ जिले में स्थित हैं।
- बैराठ सभ्यता का उत्खनन 1937 ई. में दयाराम साहनी के द्वारा करवाया गया, तत्पश्चात 1962-63 ई. में नीलरत्न बनर्जी एवं कैलाशनाथ के निर्देशन में उत्खनन कार्य करवाया गया।
- बैराठ की गणेश, बीजक एवं भीम की डूंगरी से प्राचीन शैल चित्रों के प्रमाण प्राप्त हुये है।
- यहाँ चाँदी की आठ 'पंचमार्क' और इन्डोग्रीक शासकों की 28 मुद्राएँ मिली हैं।
- बैराठ से अशोक स्तम्भ एवं एक गोल मंदिर के अवशेष भी मिले हैं।
- बैराठ के निकट से ही अशोक का भाब्रू अभिलेख प्राप्त हैं, जो अशोक को बोद्ध धर्मानुयायी सिद्ध करता हैं।
आहड सभ्यता
- आहड़ राजस्थान के उदयपुर जिले में आहड़ नदी (बेडच) के तट पर स्थित है।
- यहाँ उत्खनन में चार हजार वर्ष पुरानी प्रस्तर धातु युगीन सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुये है।
- इसका उत्खनन सर्वप्रथम 1953 ई. में अक्षय कीर्ति व्यास के द्वारा किया गया।
- यहाँ उत्खनन में बस्तियों के आठ स्तर मिले हैं।
- यहाँ मकानों में एक से अधिक चूल्हे मिलना संयुक्त परिवार प्रणाली की विद्यमानता को प्रकट करते हैं।
- आहड़ सभ्यता से मिले मृदभांड इसको लाल - काले मृदभांड वाली संस्कृति का प्रमुख केंद्र सिद्ध करते हैं।
- आहड़ का दूसरा नाम ताम्रवती नगरी भी मिलता हैं जो यहाँ तांबे के ओजारो एवं उपकरणों के अत्यधिक प्रयोग का सूचक हैं।
- तोल के बाट व माप मिलना यहाँ वाणिज्य व्यापार की उन्नति के संकेत करता हैं।
बालाथल सभ्यता
- बालाथल वर्तमान में उदयपुर की वल्लभनगर तहसील के बालाथल ग्राम में स्थित हैं।
- बालाथल सभ्यता का उत्खनन प्रो. वी.एन. मिश्र के निर्देशन में 1993 ई. में किया गया हैं।
- बालाथल में 1800 ईसा पूर्व के लगभग ताम्र पाषाणीक सभ्यता तथा 600 ईसा पूर्व लोहयुगीन सभ्यता आबाद होने का अनुमान हैं।
- उत्खनन में लोहे के ओजार प्रचुर मात्रा में प्राप्त हुये हैं।
- लोहा गलाने की पांच भट्टियों के अवशेष भी प्राप्त हुये हैं।
- लोह युग में यहाँ नलकूप होने के भी संकेत मिले हैं।
- उत्खनन में मिट्टी से बनी सांड की आकृतियां मिली है, जिनका प्रयोग संभवतः पूजा के लिए किया जाता था।
गणेश्वर सभ्यता
- गणेश्वर सभ्यता वर्तमान में राजस्थान के नीम का थाना जिले में कांटली नदी के उदगम पर स्थित हैं।
- इसका उत्खनन रत्नचन्द्र अग्रवाल के निर्देशन में हुआ हैं।
- यहाँ से 2800 ईसा पूर्व की सभ्यता के अवशेष प्राप्त हुये हैं।
- गणेश्वर से प्रचुर मात्रा में ताम्र आयुध व उकरण मिले हैं जो इसे ताम्रयुगीन सभ्यताओं में प्राचीनतम सिद्ध करते हैं।
- गणेश्वर भारत की ताम्र सभ्यताओ की जननी माना जाता हैं।
- गणेश्वर में मकानों के लिए पत्थर का प्रयोग करने के साक्ष्य मिलते हैं।
- बस्ती को बाढ़ से बचाने के लिए पत्थर के बाँध भी बनाये जाते थे।
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