बीकानेर का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Bikaner | Rajasthan History for RSSB CET Exam
राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित बीकानेर का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Bikaner के बारे में विस्तृत विवरण -
- राव बीका
- राव बीका मारवाड़ के शासक राव जोधा का पुत्र था।
- राव जोधा के ताना से राव बीका 1465 ई. में जांगल प्रदेश में आ गया था।
- करणीमाता की कृपा से राव बीका ने नवीन राज्य बीकानेर की स्थापना की।
- राव बीका ने देशनोक में करणीमाता के मूल मंदिर का निर्माण करवाया।
- राव बीका ने पुंगल के राव शेखा की पुत्री से विवाह किया।
- राव बीका ने 1488 ई. में बीकानेर की स्थापना कर राठौड़ सत्ता का दूसरा केंद्र बनाया।
- राव बीका के बाद राव नरा बीकानेर का शासक बना था।
- राव नरा की मृत्यु के बाद राव लूणकर्ण 1505 ई. में बीकानेर का शासक बना।
- राव लूणकर्ण
- राव लूणकर्ण राव बीका का छोटा पुत्र था।
- राव लूणकर्ण ने नागौर के शासक मुहम्मद खां को हराया।
- 1526 ई. में ढोसी के युद्ध में नारनौल के नवाब अबीमीरा से लड़ते हुये राव लूणकर्ण मारा गया।
- बीठू सूजा के ग्रन्थ में "राव जैतसी रो छंद" में राव लूणकर्ण को "कलियुग का कर्ण" कहा गया।
- जयसोम द्वारा रचित ग्रन्थ "कर्मचन्द्रवन्शोत्किर्तनकं काव्यम" में राव लूणकर्ण की दानशीलता की तुलना कर्ण से की गई।
- राव लूणकर्ण ने लूणकरणसर झील का निर्माण करवाया था।
- राव जैतसी
- राव जैतसी ने 1534 ई. में काबुल के मुगल शासक कामरान (हुमायूँ का भाई) को पराजित किया।
- बीठू सूजा ने "राव जैतसी रो छंद" ग्रन्थ की रचना की।
- 1541 ई. में पाहेबा (जोधपुर) के युद्ध में मालदेव की सेना से लड़ता हुआ राव जैतसी वीर गति को प्राप्त हुआ।
- राव कल्याणमल (1541-74)
- राव कल्याणमल ने खानवा के युद्ध 1527 ई. में राणा सांगा की ओर से भाग लिया था।
- 1570 ई. में अकबर के नागौर दरबार में राव कल्याणमल ने मुगल अधीनता स्वीकार की।
- कल्याणमल मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला प्रथम राठौड़ शासक था।
- राव कल्याणमल ने 1544 ई. में गिरी सुमेल के युद्ध में मालदेव के विरुद्ध शेरशाह की ओर से भाग लिया था।
- राव कल्याणमल ने अपनी पुत्री का विवाह अकबर से साथ किया और अपने पुत्रो रायसिंह एवं पृथ्वीराज को मुगल दरबार में भेज दिया।
- राव कल्याणमल ने भटनेर के किले पर अधिकार किया था।
- राव कल्याणमल के पुत्र पृथ्वीराज को राजस्थानी साहित्य का पीथल कहा जाता है।
- पृथ्वीराज ने वेलि किशन रुक्मणी री ग्रन्थ लिखा, यह ग्रन्थ गागरोन दुर्ग में लिखा गया था।
- राव रायसिंह
- 1570 ई. के अकबर के नागौर दरबार के समय मुगल सेवा में सम्मिलित हुआ।
- अकबर के द्वारा राव रायसिंह को गुजरात एवं कंधार अभियान के लिए भेजा गया।
- अकबर ने राव रायसिंह को 1572 ई. में जोधपुर का प्रशासक नियुक्त किया गया।
- 1574 ई. में महाराजाधिराज की उपाधि के साथ बीकानेर का शासक बना।
- जहाँगीर ने 5000 का मनसब प्रदान किया।
- राव रायसिंह ने बीकानेर में जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया।
- जूनागढ़ दुर्ग के दरवाजे पर जयमल - फत्ता की पाषाण मूर्तियाँ लगवाई।
- राव रायसिंह ने "रायसिंह महोत्सव" नामक ऐतिहासक ग्रन्थ अवम "ज्योतिष रत्नमाला" नामक ग्रन्थ पर "बाल बोधिनी" नाम से टीका लिखी।
- मुंशी देवीप्रसाद ने राव रायसिंह को "राजपूताने के कर्ण" की संज्ञा दी।
- राव कर्णसिंह
- चिंतामणि भट्ट के ग्रन्थ शुकसप्तति में बीकानेर के शासक राव कर्णसिंह को "जंगलधर बादशाह" कहा गया।
- जाखणीयाँ गाँव के सीमा विवाद को लेकर नागौर के शासक अमरसिंह के मध्य मतीरे की राड के नाम से युद्ध हुआ।
- राव कर्णसिंह ने "साहित्य कल्पद्रुम" नामक ग्रन्थ लिखा।
- राव कर्णसिंह के दरबारी विद्वान गंगानद मैथिल ने कर्णभूषण एवं काव्य डाकिनी नामक ग्रन्थ लिखे।
- राव कर्णसिंह ने पूत्र पद्मसिंह और केसरीसिंह को मुगल उतराधिकार युद्ध में औरंगजेब की सहायतार्थ भेजे।
- राव अनूपसिंह
- औरंगजेब ने राव अनूपसिंह को "महाराजा " एवं "माही मरातिब" की उपाधि प्रदान की।
- दक्षिण भारत से अनके मूर्तियाँ लाकर बीकानेर में "तैंतीस करोड़ देवताओं" के मंदिर में रखवाया।
- राजस्थानी ग्रंथो का संग्रह करके "अनूप संस्कृत" पुस्तकालय में रखवाया।
- राव अनूपसिंह के काल को बीकानेर चित्रकला शैली का स्वर्णकाल कहा जाता है।
- राव अनूपसिंह के समकालीन विद्वान आनन्दराम ने गीता का सर्वप्रथम मारवाड़ी गद्य एवं पद्य में अनुवाद किया।
- राव अनूपसिंह ने अनुपोदय, अनूप विवेक,काम प्रबोध एवं श्राद्ध प्रयोग चिंतामणि ग्रन्थ लिखे।
- राव सुजान सिंह के शासनकाल में भी मारवाड़ के शासक अजीतसिंह एवं नागौर के शासक बख्तावरसिंह ने बीकानेर पर आक्रमण किया था, लेकिन सफलता नही मिली।
- राव जोरावरसिंह ने हुरडा सम्मलेन (1734 ई.) में बीकानेर का प्रतिनिधित्व किया था।
- गजसिंह
- 1747 ई. में गजसिंह के बड़े भाई अमरसिंह ने जोधपुर राज्य की सेना के साथ बीकानेर पर चढाई की परन्तु उसे गजसिंह से हार का सामना करना पड़ा।
- अवध के नवाब सफदरजंग को दबाने के लिए मुगल सेना के साथ अपनी सेना भेजी, लेकिन स्वयं कभी मुगल दरबार में नही गया।
- मुगल सम्राट ने गजसिंह को 7000 मनसब एवं "श्री राजराजेश्वर महाराजाधिराज महाराजा शिरोमणि श्री गजसिंह" का खिताब दिया।
- 1755 ई. में अकाल पड़ने पर प्रजा को अनेक इमारतों का निर्माण कार्य प्रारम्भ करवाकर बहुत से लोगों को काम देकर राहत प्रदान की थी।
- बीकानेर शहर के कोट का निर्माण करवाया।
- सूरतसिंह
- 21 मार्च 1818 को बीकानेर के सूरतसिंह ने ईस्ट इण्डिया कंपनी (अंग्रेजों) के साथ संधि की।
- सूरतसिंह ने 1805 ई. में भटनेर दुर्ग पर अधिकार कर दुर्ग का नाम हनुमानगढ़ रखा।
- सूरतसिंह को अपने सामन्तो के विद्रोह को अंग्रेजी सेना की सहायता से दबाना पड़ा।
- सूरतसिंह ने वर्तमान करणीमाता मंदिर का निर्माण करवाया।
- रतन सिंह
- रतन सिंह के शासनकाल में 1844 ई. में बीकानेर रियासत में कनयाओ को न मारने की आण (शपथ) जारी की।
- 1844 ई. में आँग्ल अफगान व प्रथम एवं द्वितीय आँग्ल सिक्ख युद्ध में अंग्रेजों की सहायता की।
- अंग्रेजों के दबाव के बावजूद ब्रिटिश विद्रोही व जनप्रिय "जवाहरजी" को अंग्रेजों को सुपुर्द नही किया।
- बीकानेर में रतन बिहारी मंदिर का निर्माण करवाया।
- सरदार सिंह
- सरदार सिंह ने 1857 ई. की क्रांति को दबाने के लिए राजकीय सेना पंजाब एवं हरियाणा तक भेजी।
- राजस्थान का एकमात्र शासक था, जिसने व्यक्तिगत रूप से क्रांति के दमन में सक्रिय भाग लिया।
- 1868 ई. में बीकानेर राज पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने के लिए सुजानगढ़ में अंग्रेजी एजेंसी की स्थापना की गई।
- डूंगरसिंह
- डूंगरसिंह के शासनकाल में में बीकानेर की प्रसिद्ध "बीकानेरी भुजिया" की शुरुआत हुई।
- 1878 ई. में डूंगरसिंह ने अंग्रेजों की सहायतार्थ काबुल में 800 ऊंट भेजे।
- महाराजा गंगासिंह (1887-1943)
- चीन के बोक्सर विद्रोह को दबाने के लिए गंगा रिसाला लेकर चीन गया, अंग्रेजों ने गंगासिंह को "चीन युद्ध मैडल" प्रदान किया।
- 1913 ई. में बीकानेर में प्रजा प्रतिनिधि सभा की स्थापना की।
- प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुये "वर्साय" के शांति सम्मेलन में भाग लिया।
- महाराजा गंगासिंह 1921 से 1925 ई. तक "नरेंद्रमण्डल" के प्रथम अध्यक्ष रहे।
- महाराजा गंगासिंह ने तीनों गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया।
- गंगासिंह ने बटलर समिति (1927 ई.) के समक्ष मांग रखी कि उनके संबंध भारतीय अंग्रेज सरकार से नही होकर इंग्लैंड के राजतंत्र के साथ माने जाये।
- "बीकानेर एक दिग्दर्शन" नामक पैम्पलेट में महाराजा गंगासिंह की दमनकारी नीतियों की आलोचना करने पर सार्वजनिक सुरक्षा कानून लागू किया एवं स्वामी गोपालदास, चंदनमल बहड, सत्यनारायण सर्राफ, एवं खूबचंद सर्राफ को "बीकानेर षड्यंत्र केस" के नाम पर गिरफ्तार किया।
- महाराजा गंगासिंह के शासनकाल में रघुवर दयाल ने 22 जुलाई, 1942 को बीकानेर प्रजा परिषद् की स्थापना की।
- पंजाब से गंगनहर लाकर "गंगानगर" बसाकर सिंचित क्षेत्र बनाया।
- शार्दूलसिंह
- शार्दूलसिंह ने नोता (विवाह निमंत्रण कर) तख्तनशीनी की भाछ (उतराधिकार कर) समाप्त किया।
- द्वितीय युद्ध में बीकानेर के सेनाओ के निरिक्षण के लिए बर्मा एवं ईरान गया।
- के. एम. पन्नीकर को बीकानेर राज्य के प्रतिनिधि के रूप में संविधान निर्मात्री सभा के लिए मनोनीत किया।
- राजस्थानी शासकों में शार्दूलसिंह ने सर्वप्रथम भारतीय संघ अधिनियम पर हस्ताक्षर किये।
- बीकानेर के राठौड़ वंश का अंतिम शासक था।