Sunday, September 01, 2024

राजस्थान के चौहान वंश का इतिहास | Chauhan Dynasty of Rajasthan | Rajasthan History for RSSB CET Exam

राजस्थान के चौहान वंश का इतिहास | Chauhan Dynasty of Rajasthan | Rajasthan History for RSSB CET Exam

राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित राजस्थान के चौहान वंश का इतिहास/Chauhan Dynasty of Rajasthanके बारे में विस्तृत विवरण - 

  • बिजौलिया शिलालेख के अनुसार सांभर झील का प्रवर्तक वासुदेव चौहानों का मूलपुरुष था
  • चौहान वंश की स्थापना 551 ई. में हुई
  • चौहान वंश का मूल स्थान सपादलक्ष (सांभर) था और उनकी राजधानी अहिछत्रपुर (नागौर) थी
  • डॉ. दशरथ शर्मा ने बिजौलिया शिलालेख के आधार पर चौहानों को ब्राह्मण बताया
  • पृथ्वीराज रासो, नैणसी, सूर्यमल्ल मीसण आदि चौहानों की उत्पति वशिष्ठ ऋषि द्वारा आबू के अग्निकुण्ड से मानते है।
  • कायमखां रासो और चन्द्रावती के शिलालेख के आधर पर चौहानों को ब्राह्मणवंशीय माना गया है।
  • वाक्पतिराज चौहानों का शक्तिशाली शासक हुआ, जिसने प्रतिहारों को परास्त कर अपनी शक्ति का परिचय दिया
  • 983 ई. का हर्षनाथ लेख विग्रहराज द्वितीय की विजयों का उल्लेख करता है, विग्रहराज द्वितीय ने गुजरात के चालुक्य शासक मूलराज को परास्त किया था।
  • विग्रहराज द्वितीय के बाद दुर्लभराज और गोविन्द तृतीय शासक हुये।
  • पृथ्वीराज विजय ग्रन्थ में गोविन्द तृतीय की उपाधि "वैरिघट्ट" मिलती है।

  • अजयराज 
    • ​अजयराज के द्वारा 1113 ई. में अजमेर नगर बसाया गया
    • अजयराज के द्वारा चाँदी और तांबे के सिक्के चलाये गये, जिन्हें अजयप्रिय द्रम्म कहा गया
    • सिक्को पर अजयराज की पत्नी सोमलदेवी का नाम भी मिलता है
    • दिगम्बरों एवं श्वेताम्बरों के शास्त्रार्थ की अध्यक्षता की गई
    • पाशर्वनाथ मंदिर के लिए एक स्वर्ण कलश भी प्रदान किया गया

  • अर्नोराज ने अजमेर में आनासागर झील एवं पुष्कर में वराह मंदिर बनवाया
  • अर्नोराज की हत्या पुत्र जग्ग्देव के द्वारा 1155 ई. में की गई

  • विग्रहराज चतुर्थ 
    • विग्रहराज चतुर्थ (1158 - 63) तोमरों को पराजित कर दिल्ली पर अधिकार किया
    • विग्रहराज चतुर्थ दिल्ली पर अधिकार करने वाला प्रथम चौहान शासक था
    • विग्रहराज चतुर्थ ने हरिकेली और उसके दरबारी विद्वान सोमदेव ने ललित विग्रहराज नाटक की रचना की
    • जयानक भट्ट ने विग्रहराज चतुर्थ को कवि बान्धव की उपाधि प्रदान की
    • विग्रहराज चतुर्थ ने अजमेर में एक संस्कृत पाठशाला बनवाकर उस पर हरिकेली नाटक की पंक्तियाँ खुदवाई
    • कुतुबद्दीन ऐबक ने संस्कृत पाठशाला को तुड़वाकर वहां "ढाई दिन का झोंपड़ा" मस्जिद बनवाई।
    • विग्रहराज चतुर्थ ने बीसलपुर बसाकर वहाँ बीसलपुर झील बनवाई
    • धर्मघोष सूरी के आदेश से एकादशी के दिन पशुवध पर अंकुश लगाया।

  • विग्रहराज चतुर्थ का उतराधिकारी अपरगांग्य एवं इसके बाद पृथ्वीराज द्वितीय शासक बना
  • पृथ्वीराज द्वितीय का उतराधिकारी उसका चाचा सोमेश्वर था

  • पृथ्वीराज तृतीय
    • शाकम्भरी के चौहानों में सबसे प्रसिद्ध पृथ्वीराज तृतीय 11 वर्ष की आयु में शासक बना
    • पृथ्वीराज तृतीय के पिता का नाम सोमेश्वर एवं माता का नाम कर्पूरदेवी था
    • पृथ्वीराज तृतीय ने कन्नोज के गहडवाल शासक जयचंद की पुत्री संयोगिता से विवाह किया
    • पृथ्वीराज तृतीय ने तराइन के प्रथम युद्ध (1191 ई.) में गजनी के शासक मुहम्मद गौरी को पराजित कर दिया था
    • पृथ्वीराज तृतीय को तराइन के द्वितीय युद्ध (1192 ई.) में मुहम्मद गौरी से पराजित होना पड़ा
    • 1182 ई. में महोबा के चंदेल शासक परमर्दिदेव को पराजित किया, जिसमे प्रसिद्ध वीर "आल्हा ऊदल" लड़ते हुये मारे गये।
    • पृथ्वीराज ने दिल्ली में पिथौरागढ़ का निर्माण करवाया था
    • पृथ्वीराज विजय के रचयिता जयानक एवं पृथ्वीराज रासो के लेखक चन्दबरदाई थे

  • रणथम्भौर में चौहान वंश 
    • रणथम्भौर में चौहान वंश का संस्थापक पृथ्वीराज तृतीय का पुत्र गोविन्दराज (1194 ई.) था
    • रणथम्भौर के चौहान वंश का प्रतापी शासक हम्मीर देव चौहान (1282 - 1301) था
    • 1291 ई. में जलालुद्दीन खलजी ने रणथम्भौर पर आक्रमण किया, लेकिन सफलता प्राप्त नही हो सकी
    • हम्मीर द्वारा मंगोल विद्रोहियों को शरण देने के कारण दिल्ली के सुल्तान अलाउद्दीन खिलजी के आक्रमण का सामना करना पड़ा, हम्मीर ने तुर्क सेना को पराजित कर दिया
    • 1301 ई. में अलाउद्दीन स्वयं सेना के साथ आकर रणथम्भौर पर आक्रमण किया
    • अलाउद्दीन ने हम्मीर के सेनानायक रणमल और रतिपाल को लालच देकर रणथम्भौर किले पर अधिकार कर लिया
    • युद्ध में हम्मीर लड़ता हुआ मारा गया और पत्नी रंगादेवी के नेतृत्व में महिलाओं ने जौहर किया
    • राजस्थान का प्रथम साका/जौहर रणथम्भौर के चौहान वंश के द्वारा किया गया
    • अलाउद्दीन ने रणथम्भौर जीतकर उलूग खां को प्रशासक नियुक्त कर दिया
    • हम्मीर महाकाव्य नयनचंद सूरी के द्वारा लिखा गया ग्रन्थ है
    • हम्मीर को 16 युद्धों का विजेता मना जाता है
    • हम्मीर देव ने पिता जेत्रसिंह के 32 वर्षो के शासनकाल की स्मृति में बत्तीस खम्भों की छतरी का निर्माण करवाया गया था
    • हम्मीर देव की मृत्यु के बाद चौहानों की रणथम्भौर शाखा समाप्त हो गई
    • जोधराज के हम्मीर रासो और चंद्रशेखर के हम्मीर हठ ग्रंथो से हम्मीर के शोर्य की जानकारी मिलती है

  • जालौर का चौहान वंश 
    • 1181 ई. में जालौर के चौहान वंश की स्थापना कीर्तिपाल के द्वारा की गई थी
    • बिजौलिया प्रशस्ति में जालौर को जाबालिपुर कहा गया है
    • जालौर के किले को सुवर्णगिरी, सोनगढ़ और कांचनगिरी भी कहा जाता है
    • कीर्तिपाल का उतराधिकारी समरसिंह था
    • समरसिंह ने जालौर में सुदृढ़ प्राचीर,कोषागार, और शस्त्रागार का निर्माण करवाया
    • कान्हडदेव जालौर के चौहान शासकों में सर्वाधिक शक्तिशाली शासक था
    • 1308 ई. में अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर के सिवाना पर अधिकार कर लिया और खैराबाद नाम रख दिया
    • 1311 ई. में कान्हड़देव के दहिया सरदार का बीका के विश्वासघात के कारण अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर के दुर्ग पर अधिकार कर लिया
    • युद्ध में लड़ते हुये कान्हड़देव मारा गया और महिलाओ के द्वारा जौहर किया गया
    • अलाउद्दीन खिलजी ने जालौर जीतकर उसका नाम जलालाबाद कर दिया
    • अलाउद्दीन खिलजी ने अलाई/तोपखाने की मस्जिद का निर्माण करवाया
    • पद्मनाभ के द्वारा कान्हडदे प्रबंध की रचना की गई

  • सिरोही का चौहान वंश 
    • सिरोही के अखयराज देवड़ा ने 1527 ई. में खानवा के युद्ध में राणा सांगा का साथ दिया
    • सिरोही के चौहान वंश का संस्थापक राव लुम्बा जालौर की देवड़ा शाखा से संबंधित था
    • 1311 ई. में परमारों से आबू और चन्द्रावती छिनकर सिरोही में स्वतंत्र सत्ता स्थापित की
    • राव लुम्बा ने अचलेश्वर मंदिर का जीर्णोद्धार करवाया
    • रायमल के पुत्र भिमान ने सरणवा पहाड़ो पर दुर्ग की स्थापना की और 1405 ई. में शिवपुरी नामक नगर बसाया
    • सुरतान देवड़ा ने 1575 ई. में अकबर की अधीनता स्वीकार की
    • सिरोही के शिवसिंह ने 11 सितम्बर, 1823 में अंग्रेजों से संधि की
    • भिमान के उतराधिकारी सहसमल ने 1425 ई. में सिरोही बसाकर राजधानी बनायी।
    • राणा कुम्भा ने सहसमल को पराजित कर अचलगढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया
    • सहसमल का उतराधिकारी लाखा के द्वारा पावागढ़ से कालिका की मूर्ति लाकर सिरोही में स्थापित की और लाखनाव तालाब का निर्माण करवाया

  • हाड़ौती का चौहान वंश 
    • चौहान वंशीय देवा हाडा ने मीणाओं को पराजित कर 1241 ई. में बूंदी राज्य की स्थापना की
    • कुम्भाकालिन रणकपुर लेख में बूंदी का नाम वृंदावती मिलता है।
    • देवा के उत्तराधिकारी समरसिंह हाडा ने 1264  ई. में कोटिया शाखा के भीलों को पराजित कर कोटा पर अधिकार किया और अपने पुत्र जेत्रसिंह दिया।
    • जैत्रसिंह हाडा ने कोटा के किले का निर्माण करवाया एवं गुलाब महल का भी निर्माण करवाया
    • बूंदी के बरसिंह हाडा ने 1354 ई. में बूंदी के तारागढ़ किले का निर्माण करवाया गया
    • तारागढ़ का किला भित्ति चित्रों के लिए प्रसिद्ध है।

  • सुर्जन हाडा (1554-85)
    • ​सुर्जन हाडा के शासनकाल से पूर्व बूंदी के शासक मेवाड़ के अधीन आते थे
    • 1569 ई. में अकबर के द्वारा रणथम्भौर पर आक्रमण के दौरान सुर्जन हाडा ने मुगल अधीनता स्वीकार कर ली
    • अकबर के द्वारा सुर्जन हाडा को रावराजा की उपाधि एवं पांच हजार का मनसब दिया गया
    • बूंदी के निकट 26 और बनारस के निकट 26 परगने जागीर के रूप में दिए गये
    • बनारस में सुर्जन हाडा द्वारा जलाशये, महल और गंगा नदी के तट पर घाट बनवाये गये
    • द्वारिकापुरी में सुर्जन हाडा द्वारा रणछोड़जी का मंदिर बनवाया गया
    • बनारस में ही सुर्जन हाडा की मृत्यु हो गई

  • राव रतनसिंह 
    • राव रतनसिंह को जहांगीर के द्वारा न्यायप्रिय होने के कारण रामराज और चित्रकला प्रेमी होने कारण सरबुलंदराय की उपाधि दी
    • जहाँगीर के द्वारा 5000 का मनसब भी दिया गया
    • राव रतनसिंह ने खुर्रम का विद्रोह दबाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई
    • राव रतनसिंह अपने लडके गोपीनाथ की हत्या करने वाले ब्राह्मणों को दण्ड नही दिया, क्योंकि वह दुराचारी था

  • राव शत्रुशाल
    • शाहजहाँ ने राव शत्रुशाल को राव की पदवी, तीन हजार जात और दो हजार का मनसब दिया
    • मुगल उत्तराधिकार युद्ध में शाहजादे दारा के पक्ष में युद्ध करते हुये सामुगढ़ में गोली लगने से वीरगति को प्राप्त हुआ
    • शत्रुशाल की स्मृति में पुत्र अनिरुद्ध हाडा ने 1683 ई. में बूंदी में चौरासी खंभों की छतरी का निर्माण करवाया

  • अनिरुद्ध की पत्नी रानी नाथावती के द्वारा रानीजी की बावड़ी का निर्माण करवाया गया
  • अनिरुद्ध का पुत्र जोधसिंह हाडा 1706 ई. में बूंदी के जेतसागर तालाब में गणगौर के अवसर पर नाव की सवारी करते समय अपनी पत्नियों और गणगौर की प्रतिमा सहित डूब गया, तभी से "हाड़ो ले डुब्यो गणगौर" विख्यात हो गया

  • बहादुरशाह ने राव बुध्द्सिंह को महाराव राणा का खिताब और परगने जागीर में दिए

  • उम्मेद सिंह 
    • उम्मेद सिंह ने कोटा के शासक और मल्हराव होल्कर की सहायता से बूंदी की गद्दी प्राप्त की
    • उम्मेद सिंह मल्हराव होल्कर को मामा कहता था
    • उम्मेद सिंह श्री जी के नाम से जाना जाता था
    • उम्मेद सिंह ने बूंदी के तारागढ़ किले में चित्रशाला का निर्माण करवाया
    • उम्मेद सिंह ने जीवनकाल में स्वयं की सोने की मूर्ति बनवाकर अंतिम संस्कार करवाया था

  • बूंदी के शासक विष्णुसिंह हाडा ने 10 फरवरी, 1818 को अंग्रेजों से संधि की

  • 1857 ई. की क्रांति के दौरान बूंदी शासक रामसिंह हाडा ने अंग्रेजों का सहयोग नही किया था
  • बूंदी शासक रामसिंह के शासनकाल में ठाकुर बलवंतसिंह जयपुर से तीज की प्रतिमा बूंदी लाये थे
  • रामसिंह के समय प्रसिद्ध कवि सूर्यमल्ल मीसण ने वंश भास्कर की रचना की

  • बूंदी का अंतिम शासक बहादुर सिंह था

बीकानेर का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Bikaner | Rajasthan History for RSSB CET Exam

बीकानेर का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Bikaner | Rajasthan History for RSSB CET Exam

राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित बीकानेर का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Bikaner के बारे में विस्तृत विवरण - 

  • राव बीका 
    • राव बीका मारवाड़ के शासक राव जोधा का पुत्र था
    • राव जोधा के ताना से राव बीका 1465 ई. में जांगल प्रदेश में आ गया था
    • करणीमाता की कृपा से राव बीका ने नवीन राज्य बीकानेर की स्थापना की।
    • राव बीका ने देशनोक में करणीमाता के मूल मंदिर का निर्माण करवाया
    • राव बीका ने पुंगल के राव शेखा की पुत्री से विवाह किया
    • राव बीका ने 1488 ई. में बीकानेर की स्थापना कर राठौड़ सत्ता का दूसरा केंद्र बनाया

  • राव बीका के बाद राव नरा बीकानेर का शासक बना था
  • राव नरा की मृत्यु के बाद राव लूणकर्ण 1505 ई. में बीकानेर का शासक बना

  • राव लूणकर्ण
    • राव लूणकर्ण राव बीका का छोटा पुत्र था
    • राव लूणकर्ण ने नागौर के शासक मुहम्मद खां को हराया
    • 1526 ई. में ढोसी के युद्ध में नारनौल के नवाब अबीमीरा से लड़ते हुये राव लूणकर्ण मारा गया
    • बीठू सूजा के ग्रन्थ में "राव जैतसी रो छंद" में राव लूणकर्ण को "कलियुग का कर्ण" कहा गया
    • जयसोम द्वारा रचित ग्रन्थ "कर्मचन्द्रवन्शोत्किर्तनकं काव्यम" में राव लूणकर्ण की दानशीलता की तुलना कर्ण से की गई
    • राव लूणकर्ण ने लूणकरणसर झील का निर्माण करवाया था

  • राव जैतसी
    • ​राव जैतसी ने 1534 ई. में काबुल के मुगल शासक कामरान (हुमायूँ का भाई) को पराजित किया
    • बीठू सूजा ने "राव जैतसी रो छंद" ग्रन्थ की रचना की
    • 1541 ई. में पाहेबा (जोधपुर) के युद्ध में मालदेव की सेना से लड़ता हुआ राव जैतसी वीर गति को प्राप्त हुआ

  • राव कल्याणमल (1541-74)
    • राव कल्याणमल ने खानवा के युद्ध 1527 ई. में राणा सांगा की ओर से भाग लिया था
    • 1570 ई. में अकबर के नागौर दरबार में राव कल्याणमल ने मुगल अधीनता स्वीकार की
    • कल्याणमल मुगल अधीनता स्वीकार करने वाला प्रथम राठौड़ शासक था
    • राव कल्याणमल ने 1544 ई. में गिरी सुमेल के युद्ध में मालदेव के विरुद्ध शेरशाह की ओर से भाग लिया था
    • राव कल्याणमल ने अपनी पुत्री का विवाह अकबर से साथ किया और अपने पुत्रो रायसिंह एवं पृथ्वीराज को मुगल दरबार में भेज दिया
    • राव कल्याणमल ने भटनेर के किले पर अधिकार किया था

  • राव कल्याणमल के पुत्र पृथ्वीराज को राजस्थानी साहित्य का पीथल कहा जाता है
  • पृथ्वीराज ने वेलि किशन रुक्मणी री ग्रन्थ लिखा, यह ग्रन्थ गागरोन दुर्ग में लिखा गया था

  • राव रायसिंह
    • ​1570 ई. के अकबर के नागौर दरबार के समय मुगल सेवा में सम्मिलित हुआ
    • अकबर के द्वारा राव रायसिंह को गुजरात एवं कंधार अभियान के लिए भेजा गया
    • अकबर ने राव रायसिंह को 1572 ई. में जोधपुर का प्रशासक नियुक्त किया गया
    • 1574 ई. में महाराजाधिराज की उपाधि के साथ बीकानेर का शासक बना
    • जहाँगीर ने 5000 का मनसब प्रदान किया
    • राव रायसिंह ने बीकानेर में जूनागढ़ दुर्ग का निर्माण करवाया
    • जूनागढ़ दुर्ग के दरवाजे पर जयमल - फत्ता की पाषाण मूर्तियाँ लगवाई
    • राव रायसिंह ने "रायसिंह महोत्सव" नामक ऐतिहासक ग्रन्थ अवम "ज्योतिष रत्नमाला" नामक ग्रन्थ पर "बाल बोधिनी" नाम से टीका लिखी
    • मुंशी देवीप्रसाद ने राव रायसिंह को "राजपूताने के कर्ण" की संज्ञा दी

  • राव कर्णसिंह
    • ​चिंतामणि भट्ट के ग्रन्थ शुकसप्तति में बीकानेर के शासक राव कर्णसिंह को "जंगलधर बादशाह" कहा गया
    • जाखणीयाँ गाँव के सीमा विवाद को लेकर नागौर के शासक अमरसिंह के मध्य मतीरे की राड के नाम से युद्ध हुआ
    • राव कर्णसिंह ने "साहित्य कल्पद्रुम" नामक ग्रन्थ लिखा
    • राव कर्णसिंह के दरबारी विद्वान गंगानद मैथिल ने कर्णभूषण एवं काव्य डाकिनी नामक ग्रन्थ लिखे
    • राव कर्णसिंह ने पूत्र पद्मसिंह और केसरीसिंह को मुगल उतराधिकार युद्ध में औरंगजेब की सहायतार्थ भेजे

  • राव अनूपसिंह
    • औरंगजेब ने राव अनूपसिंह को "महाराजा " एवं "माही मरातिब" की उपाधि प्रदान की
    • दक्षिण भारत से अनके मूर्तियाँ लाकर बीकानेर में "तैंतीस करोड़ देवताओं" के मंदिर में रखवाया
    • राजस्थानी ग्रंथो का संग्रह करके "अनूप संस्कृत" पुस्तकालय में रखवाया
    • राव अनूपसिंह के काल को बीकानेर चित्रकला शैली का स्वर्णकाल कहा जाता है
    • राव अनूपसिंह के समकालीन विद्वान आनन्दराम ने गीता का सर्वप्रथम मारवाड़ी गद्य एवं पद्य में अनुवाद किया
    • राव अनूपसिंह ने अनुपोदय, अनूप विवेक,काम प्रबोध एवं श्राद्ध प्रयोग चिंतामणि ग्रन्थ लिखे

  • राव सुजान सिंह के शासनकाल में भी मारवाड़ के शासक अजीतसिंह एवं नागौर के शासक बख्तावरसिंह ने बीकानेर पर आक्रमण किया था, लेकिन सफलता नही मिली

  • राव जोरावरसिंह ने हुरडा सम्मलेन (1734 ई.) में बीकानेर का प्रतिनिधित्व किया था

  • गजसिंह
    • 1747 ई. में गजसिंह के बड़े भाई अमरसिंह ने जोधपुर राज्य की सेना के साथ बीकानेर पर चढाई की परन्तु उसे गजसिंह से हार का सामना करना पड़ा
    • अवध के नवाब सफदरजंग को दबाने के लिए मुगल सेना के साथ अपनी सेना भेजी, लेकिन स्वयं कभी मुगल दरबार में नही गया
    • मुगल सम्राट ने गजसिंह को 7000 मनसब एवं "श्री राजराजेश्वर महाराजाधिराज महाराजा शिरोमणि श्री गजसिंह" का खिताब दिया
    • 1755 ई. में अकाल पड़ने पर प्रजा को अनेक इमारतों का निर्माण कार्य प्रारम्भ करवाकर बहुत से लोगों को काम देकर राहत प्रदान की थी
    • बीकानेर शहर के कोट का निर्माण करवाया

  • सूरतसिंह 
    • 21 मार्च 1818 को बीकानेर के सूरतसिंह ने ईस्ट इण्डिया कंपनी (अंग्रेजों) के साथ संधि की
    • सूरतसिंह ने 1805 ई. में भटनेर दुर्ग पर अधिकार कर दुर्ग का नाम हनुमानगढ़ रखा
    • सूरतसिंह को अपने सामन्तो के विद्रोह को अंग्रेजी सेना की सहायता से दबाना पड़ा
    • सूरतसिंह ने वर्तमान करणीमाता मंदिर का निर्माण करवाया

  • रतन सिंह
    • रतन सिंह के शासनकाल में 1844 ई. में बीकानेर रियासत में कनयाओ को न मारने की आण (शपथ) जारी की
    • 1844 ई. में आँग्ल अफगान व प्रथम एवं द्वितीय आँग्ल सिक्ख युद्ध में अंग्रेजों की सहायता की
    • अंग्रेजों के दबाव के बावजूद ब्रिटिश विद्रोही व जनप्रिय "जवाहरजी" को अंग्रेजों को सुपुर्द नही किया
    • बीकानेर में रतन बिहारी मंदिर का निर्माण करवाया

  • सरदार सिंह 
    • सरदार सिंह ने 1857 ई. की क्रांति को दबाने के लिए राजकीय सेना पंजाब एवं हरियाणा तक भेजी
    • राजस्थान का एकमात्र शासक था, जिसने व्यक्तिगत रूप से क्रांति के दमन में सक्रिय भाग लिया
    • 1868 ई. में बीकानेर राज पर प्रशासनिक नियंत्रण स्थापित करने के लिए सुजानगढ़ में अंग्रेजी एजेंसी की स्थापना की गई

  • डूंगरसिंह 
    • डूंगरसिंह के शासनकाल में में बीकानेर की प्रसिद्ध "बीकानेरी भुजिया" की शुरुआत हुई
    • 1878 ई. में डूंगरसिंह ने अंग्रेजों की सहायतार्थ काबुल में 800 ऊंट भेजे
  • महाराजा गंगासिंह (1887-1943) 
    • चीन के बोक्सर विद्रोह को दबाने के लिए गंगा रिसाला लेकर चीन गया, अंग्रेजों ने गंगासिंह को "चीन युद्ध मैडल" प्रदान किया
    • 1913 ई. में बीकानेर में प्रजा प्रतिनिधि सभा की स्थापना की
    • प्रथम विश्व युद्ध के बाद हुये "वर्साय" के शांति सम्मेलन में भाग लिया
    • महाराजा गंगासिंह 1921 से 1925 ई. तक "नरेंद्रमण्डल" के प्रथम अध्यक्ष रहे
    • महाराजा गंगासिंह ने तीनों गोलमेज सम्मेलन में भाग लिया
    • गंगासिंह ने बटलर समिति (1927 ई.) के समक्ष मांग रखी कि उनके संबंध भारतीय अंग्रेज सरकार से नही होकर इंग्लैंड के राजतंत्र के साथ माने जाये
    • "बीकानेर एक दिग्दर्शन" नामक पैम्पलेट में महाराजा गंगासिंह की दमनकारी नीतियों की आलोचना करने पर सार्वजनिक सुरक्षा कानून लागू किया एवं स्वामी गोपालदास, चंदनमल बहड, सत्यनारायण सर्राफ, एवं खूबचंद सर्राफ को "बीकानेर षड्यंत्र केस" के नाम पर गिरफ्तार किया
    • महाराजा गंगासिंह के शासनकाल में रघुवर दयाल ने 22 जुलाई, 1942 को बीकानेर प्रजा परिषद् की स्थापना की
    • पंजाब से गंगनहर लाकर "गंगानगर" बसाकर सिंचित क्षेत्र बनाया

  • शार्दूलसिंह
    • शार्दूलसिंह ने नोता (विवाह निमंत्रण कर) तख्तनशीनी की भाछ (उतराधिकार कर) समाप्त किया
    • द्वितीय युद्ध में बीकानेर के सेनाओ के निरिक्षण के लिए बर्मा एवं ईरान गया
    • के. एम. पन्नीकर को बीकानेर राज्य के प्रतिनिधि के रूप में संविधान निर्मात्री सभा के लिए मनोनीत किया
    • राजस्थानी शासकों में शार्दूलसिंह ने सर्वप्रथम भारतीय संघ अधिनियम पर हस्ताक्षर किये
    • बीकानेर के राठौड़ वंश का अंतिम शासक था

मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Marwar | Rajasthan History for RSSB CET Exam

मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास | Rathore Dynasty of Marwar | Rajasthan History for RSSB CET Exam

राजस्थान CET स्नातक स्तर परीक्षा से संबंधित मारवाड़ का राठौड़ वंश का इतिहास/Rathore Dynasty of Marwar के बारे में विस्तृत विवरण - 

  • जोधपुर के राठौड़ो का मूलपुरुष सीहा था।
  • कन्नोज के गहडवाल जयचंद का वंशज माना जाता है।
  • सीहा सेतराम का पुत्र था।
  • सीहा केवल मारवाड़ के एक छोटे से भाग पाली से उत्तर पश्चिम में अपना राज्य स्थापित कर पाया था।
  • बीठू गाँव (पाली के पास) से मिले लेख के अनुसार 1273 ई. में सिंध के मुस्लिम लुटेरो से लड़ते हुये राव सीहा ने वीरगति प्राप्त की।

  • आस्थान
    • आस्थान राव सीहा का पुत्र था।
    • जलालुद्दीन खिलजी की सेना पाली पर आक्रमण के दौरान आस्थान पाली की रक्षा करता हुआ 1291 ई. में वीरगति को प्राप्त हुआ।
  • धूहड
    • आस्थान का उतराधिकारी था।
    • धूहड ने प्रतिहारों को परास्त कर के मण्डोर पर अधिकार किया।

  • रायपाल धूहड का बड़ा पुत्र था।

  • राव चून्डा 
    • राव चून्डा ने अपने साहस और कूटनीति से मण्डोर पर अधिकार कर लिया।
    • राव चून्डा ने मण्डोर को राजधानी बनाई।
    • राव चून्डा ने खाटू, डीडवाना, सांभर, अजमेर, नाडोल आदि पर भी अधिकार कर लिया था।
    • राव चून्डा ने नागौर के पास चून्डासर तालाब बनवाया।
    • राव चून्डा की पत्नी ने चाँद कँवर ने "चाँद बावड़ी (जोधपुर)" का निर्माण करवाया।
    • पुंगल के भाटियों द्वारा धोखे से 1423 ई. में मारा गया।

  • राव जोधा 
    • राव जोधा मारवाड़ के रणमल का पुत्र था
    • राव जोधा ने 1459 ई. में जोधपुर नगर बसाया और राजधानी बनायी
    • राव जोधा ने चिड़ियाटूंक पहाड़ी पर मेहरानगढ़ दुर्ग बनवाया
    • राव जोधा ने किले के भीतर नागनेची माता का मंदिर बनवाया
    • राव जोधा की पत्नी जसमादे ने जोधपुर में राणीसर तालाब बनवाया

  • राव मालदेव
    • राव मा​लदेव, राव गांगा का पुत्र था
    • राव मा​लदेव  ने खानवा के युद्ध में राणा सांगा की ओर से भाग लिया
    • 1536 ई. में जैसलमेर के राव लूणकरण की पुत्री "उमादे" से विवाह किया, जो इतिहस में "रूठी रानी" के नाम से प्रसिद्ध हुई
    • 1543-44 ई. में राव मा​लदेव को शेरशाह सूरी के विरुद्ध युद्ध लड़ना पड़ा
    • राव मा​लदेव के सेनापति जेता और कूंपा ने जनवरी, 1544 में गिरी सुमेल में शेरशाह से युद्ध किया और वीरगति को प्राप्त हो गये
    • शेरशाह की मृत्यु के बाद मालदेव ने पुन जोधपुर और आसपास के क्षेत्र पर अधिकार कर लिया
    • 1557 ई. में "हरमाड़ा" के युद्ध में राव मा​लदेव ने मेवाड़ के शासक राणा उदयसिंह को परास्त किया
    • अबुल फजल और निजामुद्दीन ने राव मालदेव की प्रशंसा करते हुये उसे "हशमत वाला राजा" कहा है
    • राव मालदेव ने जोधपुर गढ़ के कोट के साथ राणीसर कोट और शहरपनाह बनवाया
    • अजमेर के तारागढ़ दुर्ग में पानी व्यवस्था करवाई। 

  • राव चन्द्रसेन
    • राव चन्द्रसेन, राव मालदेव का पुत्र था
    • राव चन्द्रसेन को अपने बड़े भाइयों राम और उदयसिंह के विरोध का सामना करना पड़ा
    • अकबर ने हुसैन कुली खां के नेतृत्व में सेना भेजकर जोधपुर पर अधिकार कर लिया
    • चंद्रसेन ने भाद्राजूण और सिवाना में रहकर मुगल सेना का सामना किया और मुगलों से अधीनता स्वीकार नही की
    • पहाड़ो में भटकते हुये 11 जनवरी, 1581 को राव चंद्रसेन का देहांत हो गया
    • विश्वेश्वरनाथ रेऊ ने जोधपुर के राव चंद्रसेन की तुलना महाराणा प्रताप से की

  •  मोटा राजा उदयसिंह
    • 1583 ई. में अकबर ने मोटा राजा उदयसिंह को मुगल अधीनता में जोधपुर का शासक नियुक्त किया
    • मोटा राजा उदयसिंह राव चंद्रसेन का भाई था
    • मोटा राजा उदयसिंह ने 1587 ई. में अपनी पुत्री जोधा बाई (जगत गुसाई) का विवाह जंहागीर के साथ कर दिया
    • उदय सिंह के पुत्र किशनसिंह ने 1609 ई. में किशनगढ़ बसाकर उसे राठौड़ सत्ता का तीसरा केंद्र बनाया गया

  • राव सूरसिंह
    • अकबर ने सूरसिंह को सावी राजा की उपाधि दी।
    • जंहागीर ने सूरसिंह को 5000 का मनसब प्रदान किया।

  • महाराजा गजसिंह
    • जंहागीर  ने गजसिंह को तीन हजार जात और दो हजार सवार के मनसब, झंडा और राजा की उपाधि से सम्मानित किया।
    • बीजापुर और कंधार अभियानों में अपनी वीरता का परिचय दिया।
    • जंहागीर ने 1621 ई. में गजसिंह को "दलथम्मन" की उपाधि दी।
    • गजसिंह ने अपनी प्रेमिका अनारा बेगम के प्रभाव में आकर छोटे पुत्र जसवंतसिंह को अपना उतराधिकारी बनाया।
    • 1638 ई. में गजसिंह की मृत्यु आगरा में हुई।
    • गजसिंह के बड़े पुत्र अमरसिंह को शाहजहाँ ने नागौर परगना प्रदान किया।

  • जसवंतसिंह प्रथम 
    • महाराजा जसवंत सिंह का जन्म 26 दिसंबर, 1626 को बुरहानपुर में हुआ
    • शाहजहाँ द्वारा टीका और खिलअत दी गई, साथ ही राजा का खिताब और 6000 जात एवं 6000 सवार का मनसब भी दिया गया
    • 1640 ई. में जोधपुर पहुचने पर गद्दीनशीनी का उत्सव मनाया गया
    • उतराधिकारी युद्ध (1657 -58) में ओरंगजेब के विरुद्ध धर्मत के युद्ध में दारा का साथ दिया
    • मुहणौत नैणसी मारवाड़ के जसवंतसिंह प्रथम के दरबार मे मंत्री था।
    • जसवंतसिंह प्रथम के समय सूरत मिश्र, न्रहरिदास, नवीन कवि एवं बनारसी दास आदि प्रसिद्ध विद्वान् थे।
    • जसवंत सिंह की पत्नी अतीरंगदे ने जोधपुर में जानसागर तालाब का निर्माण करवाया, जिसे शेखावात जी का तालाब कहा जाता है।
    • दूसरी पत्नी जसवंतदे ने जोधपुर में राइका बाग और कल्याण सागर का निर्माण करवाया, जिसे वर्तमान में रातानाडा कहा जाता है

  • अजीत सिंह
    • जसवंतसिंह की मृत्यु के बाद 1679 में लाहौर में अजीत सिंह का जन्म हुआ।
    • अजीत सिंह का लालन पोषण गौरा धाय ने किया, जिसको मारवाड़ की पन्नाधाय कहा जाता है।
    • जोधपुर में फतहमहल मूलनायक एवं घनश्याम मंदिर का निर्माण करवाया।
    • दुर्गा पथ, भाषा और गुणसागर नामक ग्रन्थ लिखे।

  • अभय सिंह
    • अअभय सिंह के शासनकाल में हकीम गिरधारी दास ने खेजड़ली में पेड़ कटवाने के आदेश दिए
    • 28 अगस्त, 1730 को अमृता देवी के नेतृत्व में 363 स्त्री-पुरुष मारे गए, इस घटना को "खेजड़ली आंदोलन" के नाम से जाना जाता है
    • "खेजड़ली आंदोलन" की स्मृति में खेजड़ली में प्रतिवर्ष भाद्रपद शुक्ल दशमी को विश्व का एकमात्र "वृक्ष मेला" आयोजित किया जाता है
    • अभय सिंह के शासन काल में जोधपुर में पेड़ो को बचाने के लिए 28 अगस्त, 1730 को अमृतादेवी के नेतृत्व में 363 स्त्री-पुरुष मारे गये, इस घटना को "खेजडली आन्दोलन" के नाम से जाना जाता है।

  • विजयसिंह 
    • विजय सिंह ने 1781 ईस्वी में मुगल सम्राट शाहआलम द्वितीय से मारवाड़ में टकसाल खोलने की अनुमति प्रदान प्राप्त की और अपने नाम से विजयशाही सिक्के चलाए
    • विजय सिंह पर पासवान गुलाबराय का अत्यधिक प्रभाव था,
    • वीर विनोद में श्यामलदास ने इसे जहांगीर का नमूना और गुलाब राय को जोधपुर का नूरजहाँ कहा है।

  • मानसिंह 
    • जयपुर के शासक जगत सिंह के साथ 13मार्च, 1807 में "गिंगोली का युद्ध " हुआ।
    • जोधपुर में नाथ सम्प्रदाय की प्रमुख पीठ "महामंदिर" का निर्माण करवाया।
    • जोधपुर में मान पुस्तकालय की स्थापना करवाई।
    • 6 जनवरी, 1818 में अंग्रेजों से संधि कर उनकी अधीनता स्वीकार कर ली।
    • मानसिंह के शासन काल में अंग्रेजों ने 1835 ई. में ऐरनपुरा में "जोधपुर लीजन" का गठन किया गया।

  • महाराजा तख्तसिंह (1843-73)
    • 1843 ई. में अंग्रेज सरकार के समक्ष "अमरकोट" पर दावा पेश किया
    • 1857 ई. की क्रांति के समय जोधपुर शासक महाराजा तख्तसिंह था
    • 1857 ई. की क्रांति के समय महाराजा ने अंग्रेजों की सहायता की
    • 1870 ई. में लार्ड मेयो के दरबार में भाग नही लेने पर महाराजा की सलामी की तोपों की संख्या कम कर दी गयी

  • ​जसवंतसिंह द्वितीय
    • जसवंतसिंह द्वितीय के द्वारा दिसम्बर, 1875 के कलकता एवं 1877 ई. के दिल्ली दरबार में भाग लिया।
    • जसवंतसिंह द्वितीय के काल में वर्ष 1883 में स्वामी दयानन्द सरस्वती जोधपुर आये थे
    • जसवंतसिंह द्वितीय के काल में जोधपुर में आर्य समाज की स्थापना हुई थी।
    • जसवंतसिंह द्वितीय के काल में ही जोधपुर में बाल विवाह पर प्रतिबन्ध लगाया गया।
    • महारानी विक्टोरिया के स्वर्ण जुबली उत्सव में भाग लेने के लिए 1887 ई. में प्रतापसिंह को मारवाड़ के प्रतिनधि के रूप इंग्लेंड भेजा

  • सरदार सिंह
    • चीन के बोक्सर युद्ध को दबाने के लिए मारवाड़ी सेना अंग्रेजों की सहायतार्थ भेजी
    • सरदार सिंह ने जसवंतसिंह द्वितीय की स्मृति में "जसवंत थड़ा" का निर्माण करवाया, जिसे राजस्थान का ताजमहल कहा जाता है।
    • इसने 1910 ई. में 29000 रु.वार्षिक मंजूर कर "एडवर्ड रिलीफ फंड" बनाया, जिससे असमर्थ लोगों को पेंशन दी जाती थी।

  • उम्मेद सिंह
    • उम्मेद सिंह के द्वारा 18 नवम्बर, 1929 को जोधपुर में "छितर पैलेस" (उम्मेद पैलेस) की नींव रखी गई।
    • उम्मेद सिंह ने गोलमेज सम्मेलन में भाग लेने के लिए राज्य प्रतिनिधि के रूप में जे. डब्ल्यू, यंग को भेजा।
    • जयनारायण व्यास को मारवाड़ की ओर से संविधान सभा का प्रतिनिधि नियुक्त किया गया।

  • हनुवंत सिंह
    • जोधपुर के राठौड़ वंश का अंतिम शासक था।
    • हनुवंत सिंह ने 9 अगस्त, 1947 को भारतीय संघ अधिनियम पर हस्ताक्षर किये