Thursday, October 03, 2024

राजस्थान के लोकदेवता | Rajasthan Ke Lokdevta | Folk deities of Rajasthan | Important for All Competitive Exams

 राजस्थान के लोकदेवता

  • पाबूजी राठौड़
    • इनका जन्म (1239 ई.) 13 वीं शताब्दी में फलौदी (जोधपुर) के निकट कोलूमण्ड में धांधल जी राठौड़ एवं कमला दे के घर हुआ।
    • ये फेरों के बीच उठकर अपने बहनोई जीन्दराव खींची से देवल चारणी (जिसकी घोड़ी केसर कालमी माँग कर लाये) की गायें छुड़ाने चले गये।
    • देचू गाँव में युद्ध (1276 ई.) में वीरगति को प्राप्त हुए।
    • अर्द्धविवाहित सोढ़ी पाबूजी के साथ सती हो गई।
    • अतः इन्हें गौरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है।
    • इनको लक्ष्मण का अवतार माना जाता है तथा मेहर जाति के मुसलमान इन्हें पीर मानकर पूजते है।
    • पाबूजी प्लेग रक्षक एवं ऊटों के देवता के रूप में पूज्य हैं।
    • पाबूजी को मारवाड़ में ऊँट लाने का श्रेय है।
    • ऊँट पालक राइका (रेबारी) जाति इन्हें अपना आराध्य मानती है। 
    • पाबूजी केसर कालमी घोड़ी, बायीं और झुकी पाग के लिए प्रसिद्ध, इनका प्रतीक चिन्ह-भाला है।
    • कोलूमण्ड में इनका प्रमुख मंदिर है जहाँ प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या को मेला भरता है।
    • 'पाबूजी के पवाड़े' माठ वाद्य के साथ नायक व रेबारी जाति द्वारा गाए जाते है।
    • चाँदा-डेमा एवं हरमल पाबूजी के रक्षक सहयोगी के रूप में जाने जाते हैं।
    • पंचसाथी - चाँदोजी, सावंत जी, डेमा जी, हरमल जी व सलजी सोलंकी इनके पंचसाथियों की श्रेणी में आते हैं।
    • 'पाबू प्रकाश': आशिया मोड़जी द्वारा पाबूजी के जीवन पर लिखी गई महत्त्वपूर्ण रचना है।
    • पाबूजी की फड़ - नायक या 'आयडी' जाति के भोपे रावण हत्था नामक वाद्य पर इस फड़ का वाचन करते है।
      • यह सबसे लोकप्रिय फड़ है।
      • फड़ में सामने भाले का चित्र तथा पाबूजी की घोड़ी 'केसर कालमी' काले रंग से चित्रित की जाती है।
    • पाबूजी- 'नैणसी री ख्यात में उल्लेख मिलता है कि पाबूजी ने मलेच्छ समझी जाने वाली 'थोरी' जाति के 7 भाईयों को न केवल शरण दी अपितु समाज में सम्मानजनक स्थान दिलवाने हेतु अथक प्रयास किया।
      • पाबूजी के अनुयायी 'थोरी' है जो पाबूजी की फड़ और पाबूजी रा पवाड़ा गाकर संदेश घर-घर पहुँचाते हैं।

  • गोगाजी चौहान
    • गोगाजी का जन्म चूरू जिले के ददरेवा नामक स्थान पर जेवर सिंह व बाछल के घर हुआ।
    • गोगाजी ने दिल्ली के सुल्तान फिरोजशाह से युद्ध किया।
    • इस युद्ध में गोगाजी के दो मौसेरे भाई अरजन व सरजन भी बादशाह की ओर से लड़ रहे थे। वे दोनों मारे गए। 
    • ये सापों के देवता माने जाते हैं तथा इन्हें जाहरपीर के नाम से पूजा जाता है।
    • ये महमूद गजनवी व गुरू गोरखनाथ के समकालीन थे।
    • वंश भास्कर में इन्हें गौ रक्षार्थ वीरगति प्राप्त करना बताया है।
    • हिन्दू व मुस्लिम दोनों सम्प्रदाय गोगाजी की आराधना करते हैं।
    • हिन्दू नागराज तो मुस्लिम गोगापीर के रूप में पूजा करते है
    • राजस्थान के किसान वर्षा के बाद हल जोतने से पहले गोगाजी के नाम की राखी 'गोगा राखड़ी' हल व हाली दोनों को बांधते हैं।
    • गोगोजी के जन्म स्थल ददरेवा को शीर्ष मेड़ी, समाधि स्थल 'गोगा मेड़ी' (नोहर-हनुमानगढ़) को 'धुरमेड़ी' भी कहते है।
    • गोगामेड़ी में प्रतिवर्ष भाद्रपद कृष्ण नवमी (गोगानवमी) को विशाल मेला भरता है।
    • गोगामेडी की बनावट मकबरा नुमा है इसके प्रवेश द्वार पर बिस्मिल्लाह शब्द अंकित है।
    • महाराजा गंगासिंह ने वहाँ गोगाजी की प्रतिमा स्थापित कर उसे मंदिर का स्वरूप दिया।
    • सांचौर (जालौर) में भी 'गोगाजी की ओल्ड़ी' नामक स्थान पर गोगाजी का मंदिर है।
    • कहावतः गाँव-गाँव खेजडी अर गाँव-गाँव गोगो।
    • विवाह से पहले ही इनकी बनने वाली पत्नि केलमदे को सांप ने डस लिया था।
    • गोगाजी की सवारी नीली घोड़ी थी।
    • गोगाजी के गुरू- गोरखनाथ थे।
    • नोटः इन्होंने गौ-रक्षा तथा मुस्लिम आक्रान्ता महमूद गजनबी से युद्ध करते हुए देश रक्षार्थ प्राण न्योछावर किये।

  • तेजा जी
    • इनका जन्म नागवंशीय जाट परिवार में 1073 ई. में नागौर जिले के खड़नाल में ताहड़ जी और रामकुंवरी के यहाँ माघ शुक्ल चतुर्दशी को हुआ था।
    • तेजाजी का विवाह पेमलदे के साथ हुआ।
    • जब तेजाजी अपनी पत्नी पेमल को लेने अपने ससुराल पनेर गये हुए थे, तब उसी दिन मेर लोग लाछा गूजरी की गायें चुरा कर ले गये।
    • गूजरी की प्रार्थना पर वे गायों को मुक्त कराने जा ही रहे थे की रास्ते में इन्हें सुरसुरा नामक स्थान पर इन्हें एक सर्प मिला।
    • तेजाजी ने सर्प को डसने से रोकते हुए वचन दिया कि वे गायों को मुक्त कराने के बाद स्वयं यहाँ आयेंगे
    • भीषण संघर्ष के बाद तेजाजी ने गायें मुक्त कराने में सफलता प्राप्त की। 
    • गायों के मुक्ति दाता तथा नागों के देवता के रूप पूज्य तेजाजी के अजमेर एवं जयपुर जिले के लगभग हर गाँव में चबूतरे है।
    • इनके चबूतरे पर पत्थर पर एक घुड़सवार व सर्प का चित्र उर्कीण है।
    • इनके पुजारी को घोड़ला तथा चबूतरे को थान कहते है।
    • तेजाजी की मूर्तियों के उत्कीर्णन में तलवार धारी अश्वारोही योद्धा के रूप में चित्रित किया जाता है जिनकी जिह्वा की सर्प द्वारा दंशित करते हुऐ प्रदर्शित किया जाता है।
    • लोकदेवता तेजाजी की सर्प दंश के कारण सुरसुरा (किशनगढ़) में भाद्रपद शुक्ल पक्ष दशमी को मृत्यु हुई थी।
    • अजमेर जिले में इनके मुख्य स्थानः सुरसुरा, ब्यावर, सैदरिया और भांवता में है।
    • ब्यावर के तेजा चौक स्थित प्राचीन थान पर प्रतिवर्ष भादवा सुदी दशमी को तेजाजी का मेला भरता है।  
    • इनकी मृत्यु का समाचार घोड़ी लीलण द्वारा उनके घर पहुंचाया गया।
    • वीर तेजाजी को काला और बाला के देवता और कृषि कार्यों का उपासक देवता के रूप में भी पूजा जाता है।
    • राजस्थान के जाट तेजाजी के प्रति अत्यधिक श्रद्धा रखते है।

  • पाबूजी
    • ​पाबूजी का विवाह अमरकोट के सूरजमल सोढ़ा की पुत्री सोढ़ी के साथ हुआ था।
    • विवाह के मध्य ही उनके प्रतिद्वंद्वी बहनोई जायल (नागौर) नरेश जींदराव खींची ने पूर्व वैर के कारण देवल चारणी की गायों को घेर लिया।
    • देवल ने पाबूजी से गायों को छुड़ाने की प्रार्थना की।
    • तीन फेरे लेने के पश्चात् चौथे फेरे से पूर्व ही वे देवल चारणी की केसर कालमी घोड़ी पर सवार होकर गायों की रक्षार्थ रवाना हो गये।
    • कड़े संघर्ष में 1276 ई. में पाबूजी अनेक साथियों सहित वीर-गति को प्राप्त हुए।
    • वीरता, प्रतिज्ञापालन, त्याग, शरणागत वत्सलता एवं गौ-रक्षा हेतु बलिदान होने के कारण जनमानस इन्हें लोक देवता के रूप में पूजता है।
    • इनका मुख्य पूजा स्थल कोलू (फलौदी) में है।
    • जहाँ प्रतिवर्ष इनकी स्मृति में मैला लगता है।
    • इनका प्रतीक चिह्न हाथ में भाला लिए अश्वारोही के रूप में प्रचलित है।
    • पाबूजी का जन्म (1239 ई.) 13 वीं शताब्दी में फलौदी (जोधपुर) के निकट कोलूमण्ड में धांधल जी राठौड़ एवं कमला दे के घर हुआ।
    • अर्द्धविवाहित सोढ़ी पाबूजी के साथ सती हो गई।
    • अतः इन्हें गौरक्षक देवता के रूप में पूजा जाता है।
    • इनको लक्ष्मण का अवतार माना जाता है तथा मेहर जाति के मुसलमान इन्हें पीर मानकर पूजते है।
    • पाबूजी प्लेग रक्षक एवं ऊटों के देवता के रूप में पूज्य हैं।
    • पाबूजी को मारवाड़ में ऊँट लाने का श्रेय है।
    • ऊँट पालक राइका (रेबारी) जाति इन्हें अपना आराध्य मानती है। 
    • पाबूजी केसर कालमी घोड़ी, बायीं और झुकी पाग के लिए प्रसिद्ध, इनका प्रतीक चिन्ह-भाला है।
    • कोलूमण्ड में इनका प्रमुख मंदिर है जहाँ प्रतिवर्ष चैत्र अमावस्या को मेला भरता है।
    • 'पाबूजी के पवाड़े' माठ वाद्य के साथ नायक व रेबारी जाति द्वारा गाए जाते है।

  • रामदेवजी
    • तंवर वंशीय अजमालजी और मैणादे के पुत्र रामदेवजी का जन्म बाड़मेर जिले की शिव तहसील के ऊँडूकासमेर गाँव में हुआ।
    • इन्हें मल्लीनाथजी के समकालीन माना जाता है।
    • बालपन में ही इन्होंने पोकरण क्षेत्र मल्लीनाथजी से प्राप्त करने के पश्चात् वहाँ भैरव नामक क्रूर व्यक्ति का अंत करके अराजकता एवं आतंक खत्म किया।
    • इनका विवाह अमरकोट के दलजी सोढ़ा की पुत्री नेतलदे से हुआ था।
    • अपनी भतीजी को पोकरण दहेज में दे देने के बाद इन्होंने रामदेवरा' (रुणेचा) गाँव बसाया
    • वहीं 1458 ई. में भाद्रपद शुक्ल एकादशी को जीवित समाधि ले ली।
    • यहाँ भाद्रपद शुक्ल द्वितीया को विशाल मेला लगता है।
    • सांप्रदायिक स‌द्भाव इस मेले की मुख्य विशेषता है।
    • हिन्दू जहाँ श्रीकृष्ण के अवतार के रूप में इनकी आराधना करते हैं
    • वहीं मुसलमान 'रामसा-पीर' क रूप में रामदेवजी को पूजते हैं।
    • सामान्यतः गाँवों में किसी वृक्ष के नीचे ऊँचे चबूतरे पर रामदेवजी के प्रतीक चिह्न 'पगलिये' स्थापित किये जाते है। ये स्थान 'थान' कहलाते हैं।
    • रामदेवजी द्वारा कामड़िया पंथ की स्थापना की गई।
    • इस पंथ के अनुयायियों द्वारा रामदेवजी के मेल में तेरहताली नृत्य प्रस्तुत किया जाता है।
    • रामदेवजी वीर होने के साथ-साथ समाज-सुधारक भी थे इन्होंने जाति प्रथा, मूर्तिपूजा और तीर्थयात्रा का विरोध किया।
    • रामदेव जी का फड़ः
      • कामड जाति के भोपे रावण हत्था नामक वाद्य पर इसका वाचन करते है।
      • रामदेव जी की फड़ का चित्रांकन सर्वप्रथम चौथमल चितेरे ने किया।
    • रामदेवजी एक मात्र ऐसे लोक देवता है जो कवि भी थे।
    • इनके द्वारा रचित 'चौबीस वाणियाँ' प्रसिद्ध है।
    • रामदेव जी के नाम पर भाद्रपद द्वितीया व एकादशी को रात्रि जागरण किया जाता है। जिसे 'जम्मा' कहते है।
    • रामदेवरा (रूणीचा) में रामदेव जी का विशाल मंदिर है।
    • यहाँ हर वर्ष भाद्रपद शुक्ला द्वितीया से एकादशी को विशाल मेला भरता है।
    • भाद्रपद शुक्ला द्वितीया 'बाबे री बीज' (दूज) के नाम से पुकारी जाती है।
    • यह तिथि रामदेव जी के अवतार की तिथि के रूप में भी लोक प्रचलित है। 

  • देवनारायण जी
    • देवनारायणजी का जन्म बगडावत (नागवंशीय गुर्जर) वंश के सवाई भोज व सेंडू (सेंदू) खटाणी के घर 1243 ई. को हुआ।
    • गुर्जर जाति - लोग इन्हें विष्णु का अवतार मानते है।
    • इनके बचपन का नाम उदय सिंह था।
    • देवनारायण जी की पत्नी का नाम पीपलदे था। (धार के शासक जयसिंह की पुत्री थी)
    • इनके जन्म से पूर्व ही इनके पिता भिनाय के शासक के साथ संघर्ष में अपने तेईस भाइयों सहित मारे गए। 
    • देवनारायण जी का अंतिम समय ब्यावर जिले में स्थित देवमाली (देमाली) पर गुजरा।
    • इनके पुत्र का नाम बीला व पुत्री का नाम बीली था।
    • बीला उनका प्रथम पुजारी हुआ।
    • देवनारायणजी ने जनता के दुखों को दूर करने के लिए अपने पराक्रम व सिद्धियों का प्रयोग कर सहयोगियों के साथ तत्कालीन आतंक व अत्याचार को दूर किया।
    • देवमाली (ब्यावर) में देह त्यागी
    • देवनारायणजी का मूल 'देवरा' आसींद (भीलवाड़ा) में है 
    • इनके अन्य प्रमुख देवरे - देवमाली (ब्यावर), देवधाम जोधपुरिया (निवाई, टोंक) व देव डूंगरी पहाड़ी (चित्तौड़) में है।
    • देवमाली (ब्यावर) गाँव को बगड़ावतों का गाँव कहा जाता है।
    • यहाँ पर देवनारायण व सवाई भोज के मंदिर हैं। 
    • इनके देवरे में उनकी प्रतिमा के स्थान पर बड़ी ईटों की पूजा की जाती है।
    • पूजा सामग्री में नीम की पत्ती अवश्य शामिल की जाती है।
    • मेला - भाद्रपद शुक्ल सप्तमी को भरता है। 
    • इन्होंने गायों की रक्षार्थ ही भिनाय ठाकुर को मारा था।
    • अतः इन्हें गौरक्षक लोक देवता के रूप में भी स्मरण किया जाता है। 

  • मल्लीनाथजी 
    • मल्लीनाथजी का जन्म मारवाड़ के रावल सलखा और जाणीदे के ज्येष्ठ पुत्र के रूप में 1358 ई. में हुआ।
    • पिता की मृत्यु के पश्चात् वे चाचा कान्हड़दे के यहाँ महेवा में शासन प्रबंध देखने लगे।
    • चाचा कान्हड़देव की मृत्यु के बाद वे 1374 ई. में महेवा के स्वामी बन गए।
    • राज्य विस्तार के क्रम में 1378 ई. में फिरोज तुगलक के मालवा के सूबेदार निजामुद्दीन की सेना को इन्होंने मार भगाया।
    • अपनी रानी रूपांदे की प्रेरणा से वे 1389 ई. में उगमसी भाटी के शिष्य बन गये और योग-साधना की दीक्षा प्राप्त की।
    • किंवदन्तियों के अनुसार वे भविष्यद्रष्टा एवं देवताओं की तरह चमत्कार प्राप्त सिद्ध पुरुष बन गए थे।
    • मल्लीनाथजी ने मारवाड़ के सारे संतों को एकत्र करके 1399 ई. में एक वृहत् हरि-कीर्तन आयोजित करवाया।
    • सी वर्ष चैत्र शुक्ल द्वितीया को इनका स्वर्गवास हो गया।
    • लूनी नदी के तटवर्ती तिलवाड़ा (बाड़मेर) गाँव में इनका मंदिर है।
    • जहाँ प्रतिवर्ष चैत्र कृष्ण एकादशी से चैत्र शुक्ल एकादशी तक विराट पशु-मेला लगता है।
    • जोधपुर के पश्चिमी परगने का नामकरण इन्हीं के नाम पर 'मालानी' किया गया था।
    • इनकी आज भी मालानी (बाड़मेर) में अत्यधिक मान्यता है।

  • वीर कल्ला जी
    • कल्ला जी मेड़ता के राव जयमल राठौड़ के छोटे भाई आससिंह के पुत्र थे।
    • मीरा इनकी बुआ थी।
    • इनका जन्म 1544 ई. में मेड़ता के निकट सामियाना गाँव (नागौर) में हुआ था।
    • बाल्यावस्था से ही कल्ला जी अपनी कुलदेवी नागणेची की आराधना करते थे।
    • ये अस्त्र-शस्त्र चलाने और औषधि विज्ञान में भी निपुण थे।
    • चित्तौड़ के तीसरे शाके (1568 ई.) में अकबर के विरुद्ध लड़ते हुए वीरगति को प्राप्त हुए।
    • युद्ध भूमि में चतुर्भज के रूप में दिखाई वीरता के कारण चार हाथों वाले देवता के रूप में प्रसिद्ध है।
    • युद्ध के दौरान कल्ला जी ने युद्ध में घायल जयमल को दोनों हाथों में तलवार पकड़ाकर उसे अपने कंधे पर बिठा लिया और स्वयं भी दो तलवारें लेकर युद्ध करने लगे।
    • जयमल और कल्ला जी दोनों ने शत्रु सेना में तबाही मचा दी।
    • इसी वीरता के कारण उनकी ख्याति चार हाथ, दो सिर वाले देवता के रूप में हुई।
    • इनकी पूजा नागरूप में भी की जाती है।
    • ऐसा माना जाता है कि वे शेषनाग के अवतार थे।
    • डूंगरपुर जिले के सामलिया गाँव में कल्ला जी की काले पत्थर की मूर्ति स्थापित है।
    • इस मूर्ति पर प्रतिदिन केसर तथा अफीम चढ़ाई जाती है।
    • केहर, कमधण, कमधज, योगी, बाल ब्रह्मचारी, कल्याण आदि नामों से पूजनीय कल्ला जी के मध्यप्रदेश, मारवाड़, बाँसवाड़ा, डूंगरपुर और मेवाड़ में करीब पाँच सौ मंदिर हैं।
    • इनके मंदिरों के पुजारी सर्पदंश से पीड़ित लोगों का उपचार करते हैं।

  • हड़भूजी
    • हड़भूजी की भी लोक देवता के रूप में पूजा की जाती है।
    • ये भूडोल (नागौर) के सांखलावंशीय मेहाजी के पुत्र और रामदेवजी के मौसेरे भाई थे।
    • ये जोधपुर के शासक राव जोधा (1438-89 ई.) के समकालीन थे।
    • रामदेवजी की प्रेरणा से इन्होंने अस्त्र- शस्त्र त्याग दिये और गुरु बालीनाथ से दीक्षा ली।
    • हड़भूजी चमत्कारी महापुरुष, वचनसिद्ध और शकुनशास्त्र के ज्ञाता थे।
    • राव जोधा ने इन्हें बेंगटी गाँव (फलौदी) भेंट किया।
    • इसी गाँव में हड़भूजी का मंदिर है जहाँ हड़भूजी की गाड़ी सुरक्षित रखी हुई है, जिसकी पूजा की जाती है।
    • यहाँ के पुजारी साँखला राजपूत ही होते हैं।

  • तल्लीनाथजी
    • तल्लीनाथजी मण्डोर के वीरमदेव के पुत्र थे।
    • इनका प्रारंभिक नाम गांगदेव था।
    • संन्यास ग्रहण करने के बाद इन्होंने गुरु जलन्धर राव से दीक्षा ली।
    • इनकी पूजा जालौर जिले में अधिक की जाती है।
    • पांचोटा गाँव (जालौर) में पंचमुखी पहाड़ी पर इनका मुख्य पूजा स्थल है, जहरीले कीड़ों के काटने पर इनकी पूजा की जाती है।
    • गाँव के किसी व्यक्ति या पशु के बीमार पड़ने या जहरीला कीड़ा काटने पर इनके नाम का ड़ोरा बांधते हैं। 

  • मेहाजी मांगळिया
    • मेहाजी मांगळिया राजस्थान के पंचपीरों में गिने जाते हैं।
    • ये राव चूण्डा के समकालीन थे।
    • इनका जन्म पंवार क्षत्रिय परिवार में हुआ था
    • किंतु पालन-पोषण अपने ननिहाल में मांगळिया गोत्र में हुआ था, इसलिए ये मेहाजी मांगळिया के नाम से प्रसिद्ध हुए।
    • इनके स्वाभिमानी स्वभाव के कारण इनके अनेक शत्रु हो गये।
    • अंत में जैसलमेर के राव राणगदेव भाटी से युद्ध करते हुए वे वीरगति को प्राप्त हुए।
    • वे अच्छे शकुन शास्त्री थे।
    • लोगों की सेवा, सहायता करने एवं उन्हें संरक्षण देने के कारण वे लोक देवता के रूप पूजे गये।
    • बापणी में इनका मन्दिर है, जहाँ भाद्रपद कृष्णा अष्टमी को मेला भरता है।

  • हड़भूजी
    • हड़भूजी की भी लोक देवता के रूप में पूजा की जाती है।
    • ये भूडोल (नागौर) के सांखलावंशीय मेहाजी के पुत्र और रामदेवजी के मौसेरे भाई थे।
    • ये जोधपुर के शासक राव जोधा (1438-89 ई.) के समकालीन थे।
    • रामदेवजी की प्रेरणा से इन्होंने अस्त्र- शस्त्र त्याग दिये और गुरु बालीनाथ से दीक्षा ली।
    • हड़भूजी चमत्कारी महापुरुष, वचनसिद्ध और शकुनशास्त्र के ज्ञाता थे।
    • राव जोधा ने इन्हें बेंगटी गाँव (फलौदी) भेंट किया।
    • इसी गाँव में हड़भूजी का मंदिर है जहाँ हड़भूजी की गाड़ी सुरक्षित रखी हुई है, जिसकी पूजा की जाती है।
    • यहाँ के पुजारी साँखला राजपूत ही होते हैं।

  • बिग्गाजी
    • गौ-सेवक एवं गौ-रक्षक बिग्गाजी का जन्म बीकानेर जिले के रोड़ी गाँव में हुआ था।
    • इनके पिता का नाम राव महन तथा माता का नाम सुल्तानी था।
    • बिग्गाजी को गायों से विशेष लगाव था और इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन गायों की सेवा में लगा दिया।
    • गायों की रक्षार्थ ही लुटेरों से संघर्ष करते हुए ये वीर गति को प्राप्त हुए।
    • जाखड़ गोत्र के जाट इन्हें अपना कुलदेवता मानते हैं।
    • बिग्गाजी का मंदिर उनके जन्म स्थल रोड़ी गाँव में बना हुआ है।
    • मंदिर में हर वर्ष 14 अक्टूबर को वीर बिग्गाजी का मेला लगता है।

  • मामा देव
    • मामा देव राजस्थान के ऐसे लोक देवता हैं, जिनकी मिट्टी-पत्थर की मूर्तियाँ नहीं बनती बल्कि लकड़ी का एक विशिष्ट व कलात्मक तोरण होता है
    • जो गाँव के बाहर मुख्य सड़क पर प्रतिष्ठापित किया जाता है।
    • मामा देव बरसात के देवता माने जाते हैं।
    • इन्हें भैंसे की बलि दी जाती है।

  • वीर फत्ताजी
    • वीर फत्ताजी का जन्म जालौर जिले के साथू गाँव में हुआ था।
    • लुटेरों से गाँव की रक्षा करते हुए इन्होंने प्राण उत्सर्ग कर दिए।
    • साथू गाँव (जालौर) में इनका विशाल मंदिर है
    • जहाँ भाद्रपद शुक्ला नवमी को मेला लगता है।

  • बाबा झुंझार जी
    • सीकर जिले के इमलोहा गाँव में राजपूत परिवार में जन्मे झुंझार जी ने मुस्लिम लुटेरों से गाँव की रक्षा करते हुए प्राण न्योछावर किये।
    • स्यालोदड़ा गाँव (सीकर) में तीन भाइयों व दूल्हा-दुल्हन के पाँच प्रस्तर स्तम्भ बने हुए है।
    • स्यालोदड़ा में प्रतिवर्ष रामनवमी को झुंझार जी का मेला भरता है।
    • इनका स्थान प्राय खेजड़ी वृक्ष के नीचे होता है।

  • हरिराम जी
    • ये सर्पदंश का इलाज करते है।
    • सुजानगढ़-नागौर मार्ग पर झोरड़ा गाँव (चुरू) में इनका मंदिर है।
    • मंदिर में साँप की बाबी एवं बाबा के प्रतीक के रूप में चरण कमल है।
  • रूपनाथ (झरड़ा)
    • ये पाबूजी के बड़े भाई बूढ़ो जी के पुत्र थे
    • इन्होंने पिता व चाचा की मृत्यु का बदला जींदराव खींची को मारकर लिया।
    • हिमाचल प्रदेश में इन्हें 'बालकनाथ' के रूप में पूजा जाता है।
    • इनका थानः कोलूमण्ड (जोधपुर) की पहाड़ी पर, बीकानेर के सिंभूदड़ा (नोखामण्डी) में स्थित है।
  • आलम जी
    • ये जैतमलोत राठौड़ थे।
    • बाड़मेर जिले के मालाणी प्रदेश में लूनी नदी के किनारे स्थित राड़धरा क्षेत्र में इन्हें लोक देवता के रूप में पूजा जाता है।
    • ढ़ांगी नाम के रेतीले टीले पर इनका स्थान बना हुआ है, जिसे आलम जी का धोरा भी कहते है।
    • यहाँ भाद्रपद माह के शुक्ल पक्ष की द्वितीया को मेला भरता है।

  • वीर पनराज जी
    • 16 वीं सदी में जैसलमेर के नया गाँव के क्षत्रिय परिवार में जन्म लिया।
    • कठौडी गाँव के ब्राह्मण परिवार की गायों को मुस्लिम लुटेरों से बचाते हुऐ प्राण न्योछावर किये।
    • इनकी स्मृति में पनराजसर गाँव में वर्ष में दो बार मेला भरता है।

  • इलोजी
    • राजस्थान के मारवाड़ में छेड़छाड़ के अनोखे लोकदेव के रूप में पूज्य इलोजी अविवाहितो को दुल्हन, नव दम्पितियों को सुखद गृहस्थ जीवन और बांझ स्त्रियों को संतान देने में सक्षम है।
    • इलोजी क्षत्रिय व गाछी जाति में लोकप्रिय हैं।
    • इनकी मनौती कुमकुम रोली से मनाई जाती है।
    • ये जीवनभर कुँवारे रहे।

Wednesday, October 02, 2024

राजस्थान का करेंट अफेयर्स | Current Affairs of Rajasthan | September, 2024 | Current Affairs for All Competitive Exams 2024

 राजस्थान का करेंट अफेयर्स  

Current Affairs of Rajasthan  

September, 2024 (II)

Current Affairs for All Competitive Exams 2024

सूर्यकांता व्यास
  • भाजपा की वरिष्ठ नेता और जोधपुर के सूरसागर विधानसभा सीट से कई बार विधायक रहीं सूर्यकांता व्यास का निधन हो गया है।
  • 87 वर्षीय सूर्यकांता व्यास को 'जीजी' के नाम से जाना जाता है।
  • भारतीय राजनीतिज्ञ और राजस्थान में पुष्करणा ब्राह्मण समुदाय की एक हस्ती थीं।
  • सूर्यकांता व्यास मूलरूप से जोधपुर की रहने वाली थीं।
  • उन्होंने राजस्थान विधानसभा में छह बार सेवा की, 2008 में सूरसागर निर्वाचन क्षेत्र में जाने से पहले जोधपुर निर्वाचन क्षेत्र से तीन बार चुनाव लड़ा। 
  • वे जोधपुर की जोधपुर सीट से 3 बार एवं सूरसागर विधानसभा सीट से 3 बार विधायक निर्वाचित हुई।
  • सबसे पहले वे वर्ष 1990 में विधायक बनीं।
  • उसके बाद वर्ष 1993 के विधानसभा चुनावों में भी उन्होंने जीत दर्ज की।
  • वर्ष 2003, 2008, 2013 और 2018 भाजपा के टिकट पर चुनाव जीतकर विधानसभा पहुंची।
  • सार्वजनिक जीवन में स्वर्गीय सूर्यकांता व्यास अपने मृदु व्यवहार और मिलनसारिता की प्रवृति के कारण जनता के बीच एक लोकप्रिय नेता के रूप में सदैव याद रखी जाएंगी।
  • विधायक रहते हुए स्व. 'जीजी' ने लोकतांत्रिक मूल्यों को समृद्ध बनाते हुए श्रेष्ठ संसदीय परंपराएं स्थापित की।
  • उनका निधन प्रदेश की राजनीति के लिए अपूरणीय क्षति है।
  • सूर्यकांता व्यास ऐसी नेता थीं जिन्हें कांग्रेस सहित अन्य राजनैतिक पार्टियों के नेता भी बहुत पसंद करते थे।


रावतभाटा : प्रदेश के पहले 700 मेगावाट परमाणु रिएक्टर में धड़कन शुरू, देश की 25वीं इकाई बनी
  • प्रदेश की पहली 700 मेगावाट की 7वीं इकाई में पहली बार क्रांतिकता (क्रिटिकलिटी रिएक्टर में नियंत्रित परमाणु विखंडन प्रतिक्रिया) पूरी हो गई।
  • इसी के साथ देश में 25वें परमाणु रिएक्टर का जन्म हो गया है।
  • जो महीने बाद इस इकाई में विद्युत उत्पादन शुरू होगा, तब इसे चलना माना जाएगा।
  • मुंबई से विशेष रूप से नाभिकीय ऊर्जा निगम के डायरेक्टर ऑपरेशन विनीत कुमार, एग्जीक्यूटिव डायरेक्टर ऑपरेशन एसडी परसवार व स्थल निदेशक सुनील गाडगिल भी मौजूद रहे
  • राजस्थान परमाणु बिजलीघर के केंद्र निदेशक एसके मालवीय ने बताया कि राजस्थान परमाणु बिजलीघर की सातवीं इकाई ने परमाणु विखंडन प्रक्रिया पूरी कर ली है और यह इकाई सफलतापूर्वक क्रांतिकता हासिल कर चुकी है।
  • 700 मेगावाट की इकाई के लिए दो कूलिंग टावर की आवश्यकता होती है।
  • एक कूलिंग टावर नवंबर तक पूरा होने की उम्मीद बताई जा रही है।
  • इससे लगभग 50% बिजली का उत्पादन ही हो पाएगा।
  • परियोजना की लागत 17 हजार करोड़ है।
  • सातवीं इकाई देश की सिल्वर जुबली रिएक्टर के रूप में गिनी जाएगी
  • देश में इस समय 24 परमाणु बिजलीघर बिजली उत्पादन कर रहे हैं, जिनकी क्षमता 8080 मेगावाट है।

प्रदेश का पहला वेस्ट टू एनर्जी प्लांट
  • राजस्थान के पहले 180 करोड़ के प्रोजेक्ट से जमवारामगढ़ रोड पर लांगडियावास में वेस्ट टू एनर्जी प्लांट लगाया है।
  • यह प्रोजेक्ट मार्च 2025 तक पूरा हो जाएगा।
  • इसके बाद प्लांट में प्रतिदिन 1000 टन कचरे की खपत होगी।
  • इससे एक घंटे में 12 मेगावाट बिजली उत्पन्न होगी यानी एक घंटे में 12000 यूनिट बिजली बनेगी।
  • यह प्लांट सातों दिन 24 घंटे काम करेगा।
  • साल में औसतन 330 दिन प्लांट में बिजली बनाई जाएगी।
  • इस तरह पूरे साल में 3.30 लाख टन कचरे से 95 हजार मेगावाट यानी 9.5 करोड़ यूनिट बिजली शहरवासियों को मिलेगी।
  • देश में ऐसा वेस्ट टू एनर्जी प्लांट दिल्ली, हैदराबाद, पुणे व जबलपुर आदि शहरों में लगा है।
  • राजस्थान के इस पहले वेस्ट टू एनर्जी प्लांट में बनने वाली बिजली ग्रिड सिस्टम से डिस्कॉम को सप्लाई की जाएगी।
  • वहां से शहरवासियों को यह बिजली मिलेगी।

मंडा रीको औद्योगिक क्षेत्र में बनेगी केंद्र की पहली ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लैबट्रांसफॉर्मर के शॉर्ट सर्किट का टेस्ट होगा
  • केंद्रीय उपभोक्ता मंत्रालय की राष्ट्रीय परीक्षणशाला मंडा रीको औद्योगिक क्षेत्र में ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लेबोरेट्री बना रही है।
  • भारत सरकार की पूरे भारत में यह पहली ट्रांसफॉर्मर टेस्टिंग लेबोरेट्री होगी।
  • इसमें 10 एमवीए क्षमता तक के ट्रांसफॉर्मर के शार्ट सर्किट टेस्ट की जांच होगी।
  • ट्रांसफॉर्मर की संपूर्ण टेस्टिंग शॉर्ट सर्किट टेस्ट सहित करने वाली केद्र सरकार की यह पहली लैब होगी।
  • इसके लिए केंद्र सरकार ने करीब 84 करोड़ का बजट स्वीकृत किया है।
  • मंडा रीको औद्योगिक क्षेत्र जयपुर ग्रामीण के कालाडेरा क्षेत्र में स्थित है
  • गाजियाबाद और कलकत्ता में छोटे ट्रांसफॉर्मर की लैब है, मंडा में संपूर्ण टेस्टिंग लैब होगी
  • इस टेस्ट के लिए पूरे देश में वर्तमान में बैंगलोर, भोपाल और बड़ौदा में ही केवल तीन ही लैब हैं।
  • बेंगलुरु व भोपाल सोसाइटी एक्ट में तथा बड़ौदा प्राइवेट लैब है।
  • मंडा में भारत सरकार की पहली टेस्ट लैब होगी।
  • शॉर्ट सर्किट टेस्ट की तीन ही लैब होने के कारण फैक्ट्री से तैयार ट्रांसफॉर्मर को शॉर्ट सर्किट टेस्ट के लिए 3 से 4 महीने का इंतजार करना पड़ता है।
  • मंडा में तैयार हो रही लैब में यह टेस्ट 1 महीने में ही हो जाएगा।

स्टेट फूड सेफ्टी इंडेक्स
  • ​राजस्थान स्टेट फूड इंडेक्स में देश में छठे स्थान पर आया है।
  • एफएसएसएआई नई दिल्ली की ओर से बीते एक साल की परफॉर्मेंस के आधार पर इंडेक्स सूची जारी की गई है।
  • 2020-21 में राजस्थान 18वें स्थान पर था और अब अलग- अलग मानकों पर मिले अंकों के बाद छठा स्थान प्राप्त किया है।
  • एफएसएसएआई मानव संसाधन और संस्थागत डेटा, कम्प्लाइंस, फूड टेस्टिंग इन्फ्रा स्ट्रक्चर एंड सर्विलेंस, ट्रेनिंग एंड कैपेसिटी बिल्डिंग, उपभोक्ता सशक्तीकरण और रैंक सुधार की कैटेगरी में अलग-अलग अंक प्राप्त करने के बाद कुल 100 में से 54.75 अंक मिले हैं।
  • राजस्थान में आयुक्तालय के गठन से पहले 2020-21 में स्टेट फूड सेफ्टी इंडेक्स में राजस्थान 18वें स्थान पर था।
  • आयुक्तालय के गठन के बाद वर्ष 2021-22 में 10वां स्थान प्राप्त किया था।
  • इस दौरान एक साल में केवल 97 खाद्य अधिकारी के जरिए प्रदेशभर से 16691 सैंपल लिए थे, जो टारगेट से 284% ज्यादा है और देश में सर्वाधिक है।
  • राजस्थान में खाद्य गुणवत्ता को सुधारने के लिए विशेष निरीक्षण अभियान चलाया।
  • 2284 कारोबारियों को इंप्रूवमेंट नोटिस जारी किए गए। 
  • फूड सेफ्टी इंडेक्स में केरल पहले स्थान, दूसरे नंबर तमिलनाडु, जम्मू-कश्मीर तीसरे, गुजरात चौथे और पंजाब पांचवें नंबर पर रहा।


फीफा से मंजूर भारत का दूसरा फुटबॉल ग्राउंड जयपुर में हुआ तैयार, आईलीग के 12 मैच होंगे, 15 टीमें आएंगी। 
  • जयपुर के विद्याधर नगर स्टेडियम को इंटरनेशनल ग्राउंड की मान्यता मिल गई है।
  • यह भारत का दूसरा और राजस्थान का पहला टर्फ फुटबॉल ग्राउंड है, जिसे फीफा की मंजूरी मिली है।
  • 13 करोड़ रु. में तैयार हुए इस ग्राउंड की घास फीफा मानकों से अप्रूव्ड है, जो बेल्जियम से मंगवाई है।
  • फीफा के सर्टिफिकेट की मान्यता 12 जुलाई 2027 तक होगी।
  • 20 हजार दर्शक खड़े हो सकते हैं। 
  • खेल सचिव नीरज के पवन ने बताया कि फीफा की मान्यता हमारे के लिए गर्व की बात है।
  • 3003 दर्शकों की क्षमता वाले इस ग्राउंड में पहली बार इंडियन फुटबॉल लीग (आई-लीग) का आयोजन होगा।
  • 19 अक्टूबर से शुरू होने वाली इस लीग के 12 मैच जयपुर को मिले हैं। 
  • राजस्थान यूनाइटेड फुटबॉल क्लब (आरयूएफसी) के चेयरमैन केके टांक ने बताया कि यह क्लब का होम ग्राउंड है। 
  • फीफा से मान्यता प्राप्त भारत का पहला टर्फ फुटबॉल ग्राउंड हैदराबाद के श्रीनिधि में है। 

सुजान जवाई होटल, सुमेरपुर
  • दुनिया के टॉप 50 होटल 2024 की लिस्ट में भारत के राजस्थान राज्य का सुजान जवाई होटल, सुमेरपुर एकमात्र ऐसा होटल है जिसे शामिल किया गया है।
  • होटल की सूची में इसे 43वां स्थान मिला है, जिसे लंदन के फेमस गिल्डहॉल में प्रदर्शित किया गया था। 
  • लंदन में पुरस्कार समारोह में 2024 के 50 सर्वश्रेष्ठ होटलों की सूची जारी की गई।
  • इस सूची में शामिल होने वाला यह भारत का एकमात्र होटल है।
  • दुनिया के 50 बेस्ट होटलों की लिस्ट अंतरराष्ट्रीय स्तर पर हुई वोटिंग से तैयार की जाती है।
  • सुजान जवाई राजस्थान के जवाई बांध में एक खूबसूरत लग्जरी होटल है।
  • ये प्रॉपर्टी अपने प्राकृतिक वातावरण में राजस्थानी शाही अनुभव देने के लिए फेमस है।
  • होटल को वाइड कैम्पिंग टेंट के रूप में बनाया गया है।
  • ये जगह काफी बड़े क्षेत्र में फैली हुई है और लग्जरी को एक अलग ही रूप देती है।
  • क्या कर सकते हैं यहां
    • लियोपार्ड/वाइल्ड सफारी : ये इलाका तेंदुओं और कई प्रकार के पक्षियों के लिए फेमस है। यहां की स्थानीय जनता भी काफी समृद्ध और रंगीन है। जवाई की खूबसूरती का पूरा अनुभव लेने के लिए, पर्यटक सुबह-सुबह जीप सफारी पर जा सकते हैं, जो स्थानीय गाइडों के साथ होती है, ये लोग इस क्षेत्र को अंदर और बाहर दोनों जगह को अच्छे से जानते हैं।
    • घुड़सवारी: जवाई क्षेत्र लेपर्ड्स और पक्षियों की एक विविध रेंज का घर है। यहां घुड़सवारी भी होती है, और इस जगह को आप घोड़े पर बैठकर भी देख सकते हैं। यहां एक दर्जन से ज्यादा मारवाड़ी और कठियावाड़ी घोड़े हैं, मेहमान जवाई के मनमोहक नजारों के साथ घुड़सवारी कर सकते हैं।
    • राबड़ी वॉक: यहां आने वाले गेस्ट राबड़ी वॉक पर भी जा सकते हैं, ये वाइल्ड वॉक सफारी गेस्ट को जंगली जगहों पर ले जाती है, जो कि राबड़ी ट्राइब द्वारा करवाई जाती है। ये लोग इन पहाड़ों पर सदियों से रह रहे हैं और ये जगहें इनके दिल के बेहद करीब है। एक्सपर्ट की मदद से गेस्ट यहां के बढ़िया फ्लोरा को एक्सप्लोर कर सकते हैं।
    • टेम्पल ट्रेल: यहां की पहाड़ियों पर कई मंदिर हैं, जो 300 साल पुराने हैं। इन मंदिरों में आपको यहां जुड़ी हुई परम्पराएं देखने को मिलेंगी। गेस्ट यहां की आरती में शामिल हो सकते हैं और लियोपार्ड देखने का एक्सपीरियंस ले सकते हैं।

दिल्ली इन्वेस्टर रोड शो
  • राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट-2024 के तहत दिल्ली में दो दिवसीय इन्वेस्टर रोड शो एवं आउटरीच का आयोजन किया जाएगा।
  • मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में यह आयोजन 30 सितम्बर से 1 अक्टूबर तक होगा।
  • इस रोड शो में राज्य के उद्योग एवं वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़, मुख्य सचिव श्री सुधांश पंत, उद्योग विभाग के प्रमुख शासन सचिव श्री अजिताभ शर्मा सहित अन्य वरिष्ठ अधिकारी भी शामिल होंगे।
  • इस कार्यक्रम के माध्यम से देशी विदेशी निवेशकों, कॉरपोरेट जगत और राष्ट्रीय अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं को प्रदेश में निवेश के लिए आमंत्रित किया जाएगा।
  • कार्यक्रम के पहले दिन 30 सितम्बर को मुख्यमंत्री श्री शर्मा के नेतृत्व में राजस्थान सरकार का प्रतिनिधिमंडल इन्वेस्टर मीट में भाग लेगा और कई कंपनियों के चेयरमैन / सीईओं के साथ मुलाकात करेगा।
  • इसके अगले दिन यह प्रतिनिधिमंडल सीपीएसई कॉन्क्लेव और एम्बबैसेडर्स राउंडटेबल में भाग लेगा।
  • इसके माध्यम से सार्वजनिक और निजी क्षेत्रों के शीर्ष अधिकारियों और विभिन्न देशों के राजनयिकों को प्रदेश में मौजूद निवेश के अवसरों की जानकारी दी जाएगी। साथ ही, उन्हें या उनके जरिए प्रमुख कंपनियों को निवेश के लिए आमंत्रित भी किया जाएगा।
  • साथ ही, विभिन्न देशों के राजदूतों राजनयिकों के साथ एक राउंडटेचल का आयोजन किया गया है।
  • इस एम्बेसेडर्स राउंडटेबल में भाग लेने के लिए अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी, जापान, इटली, दक्षिण कोरिया, ऑस्ट्रेलिया, संयुक्त अरब अमीरात, डेनमार्क, इंडोनेशिया, सिंगापुर, तुर्की, स्पेन, स्विट्‌जरलैंड, कतर, ब्राजील, दक्षिण अफ्रीका सहित कई प्रमुख देशों के राजदूतों और राजनयिकों को आमंत्रित किया गया है।
  • मुख्यमंत्री के नेतृत्व वाला प्रतिनिधिमंडल केंद्रीय सार्वजनिक उपक्रमों के कॉन्क्लेव में भी शामिल होगा और केंद्र सरकार के स्वामित्व वाले सार्वजनिक क्षेत्र के उद्यमों (सेंट्रल पब्लिक सेक्टर एंटरप्राइजेज) के चेयरमैन तथा सीईओ और अन्य वरिष्ठ अधिकारियों के साथ बातचीत करेगा।
  • इस दौरान राज्य में नई परियोजनाओं पर काम करने या सहयोग के नए अवसरों तलाशने के लिए इन सभी को आमंत्रित किया जाएगा।
  • राइजिंग राजस्थान समिट को सफल बनाने के लिए राज्य सरकार बड़े पैमाने पर देशी-विदेशी निवेशकों, संस्थाओं और कॉरपोरेट जगत के शीर्ष अधिकारियों से लगातार बैठकें कर रही है, ताकि आने वाले समय में प्रदेश में बड़े पैमाने पर निवेश ही सके।

रयूएचएस अस्पतालः रिम्स के रूप में विकसित होगा
  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री श्री गजेन्द्र सिंह खींवसर ने कहा कि राजस्थान स्वास्थ्य विज्ञान विश्वविद्यालय (आरयूएचएस) से संबद्ध अस्पताल को एम्स की तर्ज पर राजस्थान इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज (रिम्स) के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • इसके लिए प्रभावी एक्शन प्लान बनाते हुए जल्द काम शुरू किया जाएगा।
  • यह काम चरणबद्ध रूप से समय सीमा में पूरा किया जाएगा।
  • साथ ही, आरयूएचएस अस्पताल में सुपर स्पेशलिटी सेवाओं के लिए आवश्यक स्टाफ भी जल्द नियोजित किया जाएगा।
  • श्री खींवसर गुरुवार को आरयूएचएस में आयोजित बैठक में विश्वविद्यालय, रिम्स के विकास एवं अन्य विषयों पर समीक्षा कर रहे थे।
  • इस दौरान उन्होंने कहा कि आमजन को अत्याधुनिक चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने, सवाई मानसिंह अस्पताल का रोगी भार कम करने एवं चिकित्सा शिक्षा के क्षेत्र में अनुसंधान को बढ़ावा देने के लिए मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा ने 750 करोड़ रुपये की लागत से आरयूएचएस को रिम्स के रूप में विकसित करने की घोषणा की है।
  • चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि रिम्स के विकास के लिए होने वाले निर्माण कार्यों, जांच एवं उपचार के लिए उपकरणों तथा चिकित्सकों एवं अन्य स्टाफ की आवश्यकताओं का आकलन कर एक एक्शन प्लान तैयार करें।
  • रिम्स के रूप में इस संस्थान का विकास होने से न केवल जयपुरवासियों, बल्कि प्रदेशभर से आने वाले रोगियों को बेहतर चिकित्सा सुविधाएं सुलभ होंगी।

राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत गोशालाओं में संधारित गोवंश के अनुदान में 10% वृद्धि की गई है।
  • राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत गोशालाओं में संधारित गोवंश के अनुदान में 10% वृद्धि की गई है।
  • गोपालन और पशुपालन मंत्री श्री जोराराम कुमावत ने बताया कि यह वृद्धि अक्टूबर माह से लागू होगी।
  • एक अक्टूबर से बढ़ने वाली अनुदान राशि के तहत बड़े गोवंश के लिए 40 रुपये के स्थान पर 44 रुपये और छोटे गोवंश के लिए 20 रुपये के स्थान पर 22 रुपये का अनुदान प्रतिदिन दिया जाएगा।
  • राज्य सरकार गोवंश संरक्षण एवं संवर्धन के लिए कटिबद्ध है और इसके लिए सभी जरूरी कदम उठाएगी।
  • अनुदान में वृद्धि से गोशाला प्रबंधकों को लाभ मिलेगा।
  • साथ ही, गोवंश को भी सहज सुविधाएं उपलब्ध होंगी।
  • केवल राज्य सरकार द्वारा पंजीकृत गोशालाओं में ही संधारित गोवंश हेतु अनुदान दिया जाता है

IIFA25 सेलिब्रेशंस'
  • राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा मार्गदर्शन में जयपुर में आगामी 7 से 9 मार्च को IIFA25 सेलिब्रेशन कार्यक्रम आयोजित किया जाएगा।
  • उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी एवं शासन सचिव पर्यटन, कला एवं संस्कृति तथा पुरातत्व विभाग श्री रवि जैन की उपस्थिति में 22 सितम्बर, 2024 को अल्बर्ट हॉल में आईआईएफए के वाइस प्रेसिडेन्ट श्री सुरेश अय्यर तथा राजस्थान सरकार के पर्यटन आयुक्त श्री विजय पाल सिंह द्वारा 'IIFA25 सेलिब्रेशन / जयपुर होस्ट सिटी एग्रीमेंट साइनिंग सेरेमनी' में एमओयू पर हस्ताक्षर किये गये।
  • उपमुख्यमंत्री दिया कुमारी ने कहा कि आईफा अवार्ड की सिल्वर जुबली के अवसर पर ऐतिहासिक रूप से जयपुर में भारतीय सिनेमा के 25 शानदार वर्षों का जश्न मनाने का समारोह आयोजित किया जाएगा।
  • इस आयोजन से राजस्थान के पर्यटन को शानदार बढ़ावा मिलेगाए यहां पर्यटन के क्षेत्र में निवेश बढ़ेगा, रोजगार के अवसर पैदा होंगे। उन्होंने कहा कि इससे पर्यटन से जुड़े सभी क्षेत्रों को फायदा होगा।
  • आयोजन के दौरान बॉलीवुड के जाने माने सितारे और फिल्मी जगत की हस्तियां जयपुर में हमारे मेहमान होंगे। 
  • इस आयोजन के माध्यम से राजस्थान की इस अनुठी संस्कृति और पर्यटन को वैश्विक मंच पर और अधिक मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री जनजातीय उन्नत ग्राम अभियान
  • इस योजना के तहत राजस्थान के 30 जिलों के 208 ब्लॉक के 6,019 गांवों में विकास कार्य कराए जाएंगे।
  • यह योजना आदिवासी क्षेत्रों में बुनियादी ढांचे के विकास, स्वास्थ्य सेवाओं में सुधार, शिक्षा के प्रसार और कौशल विकास को बढ़ावा देने के लिए व्यापक दृष्टिकोण रखती है।
  • ​देशभर के 63 हजार से अधिक आदिवासी बाहुल्य गांवों को विकासित करने का लक्ष्य, 79,156 करोड़ रुपये खर्च होंगे
  • केंद्र सरकार ने देशभर के आदिवासी और पिछड़े क्षेत्रों के समग्र विकास के लिए 79,156 करोड़ रुपये की एक ऐतिहासिक योजना को मंजूरी दी है।
  • इस योजना का उद्‌देश्य आदिवासी समुदायों के सामाजिक और आर्थिक उत्थान को सुनिश्चित करना है।
  • प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में इस महत्वाकांक्षी योजना की घोषणा की गई।
  • इस योजना का क्रियान्वयन 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के 549 जिलों में किया जाएगा।
  • योजना के तहत 63 हजार से अधिक गांवों को चुना गया है, जहां करीब 5 करोड़ से अधिक आदिवासी और पिछड़े वर्ग के लोग लाभान्वित होंगे।​
  • वर्ष 2011 की जनगणना के अनुसार, देश में 10-45 करोड़ से अधिक आदिवासी समुदायों की आबादी है, जो मुख्य रूप से दूरदराज और पिछड़े क्षेत्रों में निवास करती है।
  • यह योजना इन्हीं समुदायों के जीवन स्तर में सुधार के लिए एक बड़ा कदम है।
  • योजना के तहत 20 लाख से अधिक पक्के मकानों का निर्माण किया जाएगा, जिनमें हर घर को स्वच्छ जल और बिजली की सुविधाएं दी जाएंगी।
  • इन आवासों में स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालयों और अन्य बुनियादी सुविधाएं भी उपलब्ध कराई जाएंगी। 
  • आदिवासी युवाओं को विभिन्न तकनीकी और व्यावसायिक कौशलों में प्रशिक्षित किया जाएगा, जिससे वे स्वरोजगार और स्थानीय उद्यमिता को बढ़ावा दे सको
  • युवाओं को फूड प्रोसेसिंग, कृषि, मत्स्य पालन और पशुपालन से संबंधित प्रशिक्षण दिया जाएगा। 
  • आदिवासी क्षेत्रों में एक हजार से अधिक मोबाइल स्वास्थ्य इकाइयों की स्थापना की जाएंगी। 
  • इन क्षेत्रों में टेलीमेडिसिन सेवाओं का भी विस्तार किया जाएगा। 
  • शिक्षा के प्रसार के लिए कई नई योजनाओं की शुरुआत की जाएगी। 
  • इसमें हजार नए छात्रावासों का निर्माण और आदिवासी छात्रों को गुणवत्ता युक्त शिक्षा प्रदान करने के लिए नए स्कूलों की स्थापना की जाएगी।
  • पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए एक हजार गांवों को पर्यटन स्थलों के रूप में विकसित किया जाएगा।
  • इसमें स्थानीय परिवारों को होमस्टे के माध्यम से रोजगार के अवसर प्रदान किए जाएंगे।

मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान के दीक्षांत समारोह के दौरान राजस्थान के मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के दौरान अटल इनोवेशन स्टूडियो एंड एक्सीलरेटर्स स्थापित करने के लिए कहा गया
  • जयपुर, भरतपुर, बीकानेर और उदयपुर में एक हजार करोड़ रुपये की लागत से अटल इनोवेशन स्टूडियो एंड एक्सीलरेटर्स स्थापित किए जा रहे हैं
  • जिससे युवाओं को रोजगार के पर्याप्त अवसर उपलब्ध हो सके।
  • इसमें सॉफ्टवेयर कोडिंग की जानकारी दी जाएगी।
  • अलग-अलग तरह से युवाओं को सॉफ्टवेयर कोडिंग से जोड़ा जाएगा।
  • इसके अलावा रोबोटिक्स फेब लैब की स्थापना होगी।
  • मल्टी मीडिया की सुविधाएं भी इसमें होंगी।
  • युवाओं को स्टार्टअप स्थापित करने तथा उनमें उद्यमिता बढ़ाने के लिए अटल एंटरप्रेन्योरशिप प्रोग्राम शुरू किया जा रहा है, जिसके माध्यम से युवाओं को देश-विदेश के उत्कृष्ट सीईओ का मार्गदर्शन मिलेगा।
  • साथ ही, इसके तहत चयनित स्टार्टअप्स को 10 करोड़ रुपये तक की फडिंग भी उपलब्ध करवाई जाएगी।

मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान का दीक्षांत समारोहः राष्ट्रपति, राज्यपाल और मुख्यमंत्री शामिल हुए
  • दिनांक 18 सितम्बर, 2024 को राष्ट्रपति श्रीमती द्रौपदी मुर्मू जयपुर के मालवीय राष्ट्रीय प्रौद्योगिकी संस्थान (एमएनआईटी) के 18 वें दीक्षांत समारोह में शामिल होने आई थी।
  • राष्ट्रपति ने समारोह में 805 स्नातक, 477 स्नातकोत्तर और 79 पीएबडी विद्यार्थियों को डिग्री प्रदान की और 20 स्वर्ण पदक प्रदान किए।
  • उन्होंने छात्रों के लिए निर्मित अरावली छात्रावास का लोकार्पण भी किया।
  • उन्होंने राष्ट्रीय तकनीकी शिक्षण संस्थाओं को शोध अनुसंधान में मौलिक दृष्टि रखते हुए कार्य करने, पर्यावरण अनुकूल तकनीक अपनाने और विकसित भारत की संकल्पना के लिए प्रतिबद्ध होकर कार्य करने का आह्वान किया


बेस्ट टूरिस्ट विलेज (सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गाँव)
  • भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम प्रतियोगिता-2024 के तहत ​नई दिल्ली के विज्ञान भवन में आयोजित पुरस्कार समारोह में देवमाली गांव को यह पुरस्कार समुदाय आधारित पर्यटन श्रेणी में दिया गया।
  • यह पुरस्कार ब्यावर के तत्कालीन कलक्टर श्री उत्सव कौशल और देवमाली गांव की सरपंच श्रीमती पूजा गुर्जर ने ग्रहण किया।
  • देवमाली देवनारायण भगवान की भूमि कहलाता है।
  • इस गांव की संस्कृति और यहां का जनजीवन ही, इसे यह पुरस्कार दिलाने में मददगार साबित हुआ।
  • मंत्रालय के संयुक्त महानिदेशक अरुण श्रीवास्तव ने बताया कि पर्यटन मंत्रालय द्वारा सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव प्रतियोगिता का आयोजन किया गया 
  • जिसके तहत ऐसे गांव को मान्यता दी जाती है जो पर्यटन स्थल का सर्वोत्तम उदाहरण प्रस्तुत करता है एवं जो संस्कृति को प्राकृतिक संपदाओं को संरक्षित करता है।
  • ऐसे गांव के रूप में देवमाली गांव को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांव में से एक के रूप में चुना गया है।
  • देवमाली में कई मायनों में अनोखा है।
  • गांव के सभी मकान मिट्टी से बने हैं।
  • भारत की आत्मा (भारत के गांवों) में पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए वर्ष 2023 में सर्वश्रेष्ठ पर्यटन गांवों की प्रतियोगिता की शुरूआत की गई थी।
  • इस पहल का उ‌द्देश्य उन गांवों की पहचान करना और उन्हें चिन्हित करना था, जो समुदाय-आधारित मूल्यों और सभी पहलुओं में स्थिरता के प्रति प्रतिवद्धता के जरिए सांस्कृतिक और प्राकृतिक संपत्ति को संरक्षित करते हैं और बढ़ावा देते हैं।
  • सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम प्रतियोगिता के दूसरे संस्करण में, 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों से कुल 991 आवेदन प्राप्त हुए, जिनमें से 36 गांवों को सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम प्रतियोगिता- 2024 की 8 श्रेणियों में विजेताओं के रूप घोषित किया गया।
  • भारत सरकार के पर्यटन मंत्रालय ने शुक्रवार को विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर सर्वश्रेष्ठ पर्यटन ग्राम प्रतियोगिता-2024 के विजेताओं की घोषणा की।
  • इस अवसर पर उपराष्ट्रपति श्री जगदीप धनकड़, केंद्रीय संस्कृति एवं पर्यटन मंत्री श्री गजेंद्र सिंह शेखावत, केंद्रीय नागरिक विमानन श्री किंजरापु राममोहन नायडू, केंद्रीय राज्य पर्यटन मंत्री श्री सुरेश गोपी सहित पर्यटन मंत्रालय के अधिकारी भी मौजूद थे।

यूएई एवं कतर में अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टर्स रोड शो
  • आगामी 9 से 11 दिसम्बर तक आयोजित होने वाले 'राइजिंग राजस्थान' ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 की तैयारियों के मद्देनजर उद्योग और वाणिज्य मंत्री कर्नल राज्यवर्धन राठौड़ के नेतृत्व में राजस्थान सरकार का एक उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल 17 से 19 सितम्बर के बीच संयुक्त अरब अमीरात (यूएई) और कतर का दौरा किया गया।
  • इस उच्चस्तरीय प्रतिनिधिमंडल में सामान्य प्रशासन विभाग के सचिव डॉ. जोगा राम, मुख्यमंत्री के संयुक्त सचिव श्री सिद्धार्थ सिहाग, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रमोशन के एडिशनल कमिश्नर श्री सौरभ स्वामी और अन्य वरिष्ठ अधिकारी शामिल हैं।
  • राइजिंग राजस्थान ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 के तहत 17 सितम्बर को दुबई में अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टर रोड शो का आयोजन किया गया।
  • निवेशकों को आमंत्रित करने के उद्देश्य से प्रतिनिधिमंडल ने संयुक्त अरब अमीरात के विदेश व्यापार राज्य मंत्री डॉ. बानी बिन अहमद अल जायीदी से दुबई में मुलाकात की।
  • दुबई के उद्योगपतियों को 9, 10 और 11 दिसम्बर, 2024 को जयपुर में आयोजित होने वाले 'राइजिंग राजस्थान' ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट में भाग लेने का न्यौता भी दिया गया।
  • 19 सितम्बर को कतर की राजधानी दोहा में इन्वेस्टर रोड शो का आयोजन किया गया।
  • इस दौरान प्रतिनिधिमंडल ने कतर सरकार के वाणिज्य एवं उद्योग मंत्रालय के अंडर सेक्रेटरी मोहम्मद बिन हसन अल मल्क से भी मुलाकात की और कतर सरकार के प्रतिनिधियों को दिसंबर में आयोजित होने वाले निवेश सम्मेलन में भाग लेने के लिए आमंत्रित किया। 
  • संयुक्त अरब अमीरात और कतर में हुए दोनों अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टर्स रोड शो का आयोजन फेडरेशन ऑफ इंडियन चैंबर ऑफ कॉमर्स एंड इंडस्ट्री (फिक्की) के सहयोग से किया गया है, जो 'राइजिंग राजस्थान' ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 का समिट पार्टनर है। इसके अलावा पीडब्ल्यूसी इंडिया इस इन्वेस्टमेंट समिट का नॉलेज पार्टनर है।
  • प्रथम अंतरराष्ट्रीय इन्वेस्टर्स मीट के तहत मुख्यमंत्री श्री भजनलाल शर्मा के नेतृत्व में एक उच्च स्तरीय प्रतिनिधिमंडल ने दक्षिण कोरिया और जापान का दौरा किया था।
  • मुख्यमंत्री की इस यात्रा के दौरान कई दक्षिण कोरियाई और जापानी कंपनियों और संस्थाओं ने राजस्थान में कारोबार करने में रुचि दिखाई थी।
  • राजस्थान का वर्तमान मुख्य सचिव सुधांश पन्त है।
  • 'राइजिंग राजस्थान' ग्लोबल इन्वेस्टमेंट समिट 2024 का आयोजन इस साल 9, 10 और 11 दिसम्बर को राजधानी जयपुर में होगा।
  • यह आयोजन राजस्थान सरकार के तत्वाधान में उद्योग एवं वाणिज्य विभाग, ब्यूरो ऑफ इन्वेस्टमेंट प्रोमोशन (बीआईपी) और राजस्थान स्टेट इंडस्ट्रियल डवलपमेंट एंड इन्वेस्टमेंट कॉरपोरेशन (रीको) के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है, जिसका नोडल विभाग बीआईपी है।
  • इस त्रि-दिवसीय मेगा समिट का उद्देश्य देश-विदेश की बड़ी-छोटी कंपनियों, अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं और निवेशकों को राज्य में आकर काम करने के लिए आमंत्रित करना, प्रदेश में विभिन्न तरह के उद्योग-धंधे लगाने में मदद करना और अन्य सुविधाएं मुहैया कराना है।
  • इस ग्लोबल समिट के दौरान कृषि, अक्षय ऊर्जा, शिक्षा और कौशल, ऑटो और ईवी (इलेक्ट्रिक व्हीकल्स), इंफ्रास्ट्रक्चर, केमिकल और पेट्रो केमिकल, पर्यटन, स्टार्टअप, खनन और ईएसडीएम / आईटी और आईटीईएस सहित विभिन्न क्षेत्रों पर विशेष सत्र का आयोजन होगा।

हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (ओटीएस)
  • हरीश चंद्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (HCM RIPA) सिविल सेवकों के प्रशिक्षण के लिए राजस्थान सरकार का एक शीर्ष स्तरीय प्रशिक्षण संस्थान है।
  • 1957 में जोधपुर में ऑफिसर्स ट्रेनिंग स्कूल (OTS) के रूप में शुरू हुआ
  • हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान (ओटीएस) को भारत सरकार के क्षमता निर्माण आयोग (सीबीसी) द्वारा सिविल सेवाओं के प्रशिक्षण संस्थानों के राष्ट्रीय मानकों के पालन के लिए मान्यता प्रदान की गई है।
  • यह प्रतिष्ठित मान्यता संस्थान की लोक प्रशासन में उत्कृष्टता के प्रति प्रतिबद्धता को दर्शाती है।
  • ओटीएस महानिदेशक श्रीमती श्रेया गुहा ने इस उपलब्धि पर गर्व व्यक्त करते हुए कहा कि यह मान्यता संस्थान की कड़ी मेहनत और समर्पण का परिणाम है।
  • हम सिविल सेवकों को आधुनिक शासन की जटिल चुनौतियों से निपटने के लिए आवश्यक कौशल प्रदान करने के लिए प्रतिबद्ध हैं।
  • उन्होंने कहा कि इस मान्यता से हरिश्चन्द्र माथुर राजस्थान राज्य लोक प्रशासन संस्थान राष्ट्रीय स्तर पर सर्वश्रेष्ठ सिविल सेवा प्रशिक्षण संस्थानों में सम्मिलित हो गया है।
  • संस्थान राष्ट्रीय मानकों के लिए निर्धारित मापदंडों का पालन कर, क्षमता निर्माण और सिविल सेवा प्रशिक्षण में उच्चतम मानकों का पालन सुनिश्चित करता है।
  • इसका उद्देश्य लोक प्रशासन और शासन में उत्कृटता लाना है।

राजस्थान प्रदेश का पहला कवर्ड ट्रैक स्टेशन
  • गांधी नगर रेलवे स्टेशन प्रदेश का पहला ऐसा स्टेशन बन गया है, जहां ट्रैक के ऊपर कवरिंग की गई है।
  • कवरिंग 70 मीटर लंबी और 38 मीटर चौड़ी है। 
  • यहां निजी फर्म को रूफ प्लाजा के 25 हजार स्क्वायर फीट में शॉपिंग एरिया, फूड और गेम जोन विकसित कर ऑपरेट करने के लिए आमंत्रित किया जाएगा
  • इसके साथ ही निजी फर्म स्टेशन पर ट्रेन ऑपरेशन को छोड़ बाकी सब मैनेज करेगी।
  • गांधीनगर स्टेशन का करीब 50 फीसदी काम पूरा कर लिया गया है। बचा हुआ काम अगले साल अप्रैल तक पूरा हो जाएगा।
  • हाल ही में रेलमंत्री अश्विनी वैष्णव के द्वारा स्टेशन पर चल रहे कार्यो की समीक्षा हेतु जयपुर के गांधी नगर स्टेशन का दौरा किया गया था।
  • सबसे पहले उन्होंने स्टेशन का 3 डी स्केल्टन, फिर रूफ प्लाजा के लिए हाल ही में की गई डेक कवरिंग देखी।
  • इस स्टेशन पर 4 एस्केलेटर, 9 लिफ्ट, डबल लेयर पार्किंग में 1300 दुपहिया, 50 चौपहिया खड़े होंगे