राजस्थान की प्राचीन सभ्यताएँ
|
सभ्यता का नाम |
विवरण |
|
कालीबंगा सभ्यता |
⇨जिला–हनुमानगढ़⇒वर्तमान घग्घर नदी के किनारे (प्राचीन दृषद्वती एवं सरस्वती नदी घाटी क्षेत्र)।⇒4000 ईसा पूर्व से अधिक प्राचीन।⇒खोज - अमलानन्द घोष द्वारा 1952 ई. में।⇒उत्खनन-श्री बी.बी. लाल, श्री बी.के. थापर एवं श्री एम.डी. खरे (1961 एवं 1964 ई. के मध्य)।⇒उत्खनन - 5 स्तरों तक, 1 व 2 स्तर सिंधु सभ्यता से प्राचीन एवं 3, 4 व 5 स्तर सिंधु सभ्यता के समकालीन।⇒सुव्यवस्थित नगर योजना के अनुसार बसा हुआ था। समकोण पर काटती सड़के एवं सड़कों के किनारे नालियाँ। मिट्टी की ईंटों को धूप में पकाकर उपयोग में ली गयी थी। लेकिन नालियों एवं कुओं में पक्की ईंटों के अवशेष मिलते हैं। लकड़ी की बल्लियों पर मिट्टी का लेप करके छतें तैयार की जाती थी।⇒पशु-पक्षियों के स्वरूप वाले खिलौने, मिट्टी की मुहरें, चूड़ियाँ, काँच के मनके, ताँबे की चूड़ियाँ, औजार एवं तौल के बाट भी मिलें है।⇒लिपि - सिंधु लिपि के समान एवं दायें से बायें लिखा जाता था।⇒बर्तनों का रंग लाल एवं सफेद रंग की रेखाएं और बर्तनों पर फूल-पतियों के अलंकरण के साथ साथ मछली, कछुए, बतख एवं हिरन की आकृतियाँ भी चित्रित की जाती थी।⇒मिट्टी के भाण्डों एवं मुहरों पर लिपि के अवशेष मिलते हैं। जिनको अभी तक पढ़ा नहीं जा सका है।⇒जुते हुए खेत के साक्ष्य एवं एक ही खेत में 02 फसलें उगातें थे।⇒भूंकप आने के प्राचीनतम साक्ष्य मिलते है। |